भारत-नेपाल की 68 किमी खुली सीमा से सटे जनपद की सुरक्षा व्यवस्था लचर, किराए पर रह रहे लोगों का सत्यापन न होने से बढ़ रहीं आपराधिक गतिविधियां
पांच वर्ष पहले बिहार के गिरोह के सदस्यों ने कई घरों में चोरी की घटना को दिया था अंजाम
बॉर्डर से मुहल्ले तक कौन आया, कौन गया, कोई पूछता वाला नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल की 68 किमी खुली सीमा से सटे जनपद की सुरक्षा व्यवस्था लचर है। चोरी, लूट, हत्या और अन्य आपराधिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। शहर के बॉर्डर पर होने की वजह से अपराधी यहां किराये पर कमरा लेकर रहते हैं और घटनाओं को आसानी से अंजाम देते हैं। पुलिस की सख्ती न होने से अपराधियों में दहशत नहीं है। शहर की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
शहर में रहने वाले किरायेदारों का रिकॉर्ड न मकान मालिकों के पास है और न ही पुलिस विभाग में। कोई हादसा हो जाए तो आरोपियों का सुराग लगाने में सुरक्षा एजेंसियों को पसीने छूट जाएंगे। मुहल्ले में जिले से बाहर के लोग किराये पर कमरा लेकर रह रहे हैं। मकान मालिक किरायेदारों का सत्यापन नहीं करते हैं। बिना किसी जांच-पड़ताल के कमरा दे देते हैं। किरायेदार बनकर जब शहर के कई मुहल्लों में कमरे की तलाश गई तो सुरक्षा में चूक की हकीकत सामने आई। रुपये का मोल भाव हर मकान मालिक ने किया, लेकिन किसी ने उसकी पहचना या अन्य जानकारी नहीं ली। यह हाल केवल जनपद मुख्यालय की नहीं है। शहर से लेकर नेपाल बाॅर्डर तक का है। ्र
संवाददाता ने रविवार को शहर के वन विभाग कॉलोनी एवं इंद्रानगर में किराएदार बनकर पड़ताल की तो लोग बिना किसी पूछताछ के किराए पर मकान देने के लिए तैयार हो गए। बातचीत में ऐसा लगा हुआ कि मकान मालिकों को सुरक्षा की कम और किराए से अधिक लगाव है।
-
किराए पर कमरा लिए, चोरी किए और चले गए
पांच वर्ष पहले शहर के एक मुहल्ले में एक साथ कई घरों का ताला टूटा था और 15 लाख रुपये से अधिक के सामान और नकदी चोरी हुए थे। पुलिस कई दिनों तक हाथ-पांव मारती रही, लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं लगा। वारदात के लगभग एक सप्ताह बाद एक व्यक्ति पुलिसकर्मी से मिला और कहा कि हम किराये पर कमरा दिए हैं। किराएदार कमरा बंद किए है। पुलिस ने छानबीन की और मुखबिरों को सक्रिय किया। उनके पीछे भागी तो जांच में पाया गया कि यह बिहार का गिरोह था। जो छोटे-छोटे शहर में किराए पर कमरा लेते हैं, रेकी करते हैं और चोरी करके भाग जाते हैं।
-
हत्या हो गई, पुलिस को पहचान में लगा वक्त
नगर के कांशीराम आवास में राजगीर का कार्य करने वाले एक व्यक्ति की हत्या हो गई थी। पुलिस को जानकारी हुई तो उसकी पहचान करने में परेशानी हुई। बात में पता चला कि मृतक का पिता अनाथ आश्रम में है। पुलिस उससे मिली, वह भी कुछ बता पाने में असमर्थ था। इसके बाद पुलिस ने खुद उसका अंतिम संस्कार किया। रिश्तेदार कुछ दिन बाद आया तो पता चला कि मृतक बिहार का रहने वाला था। लेकिन बिहार में किस जनपद और गांव का था। किसी को जानकारी नहीं मिली। इस मामले में उसी के साथ काम करने वाले एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
-
नए शहर में रहते हैं पांच हजार से अधिक किराएदार
सीमा विस्तार के बाद शहर का दायरा बढ़ चुका है। शहर से सटे कई गांव जो शहर में रहते हुए भी गांव में गिने जाते थे। वह भी शहर का हिस्सा बन चुके हैं। यह अब नए शहर बन चुके हैं। यहां तकरीबन पांच हजार से अधिक लोग बाहर से आकर किराये पर कमरा लेकर रहते हैं। हर मुहल्ले में 10वेंं घर में किराएदार हैं, लेकिन पुलिस विभाग को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि कितने लोग बाहर के रह रहे हैं। जिससे अगर कोई वारदात हो तो पहचान करने में आसानी हो।
-
गोरखनाथ मंदिर में हथियार लेकर घुसने वाले की मिली थी इनपुट
एक वर्ष पहले चाकू लेकर गोरखनाथ मंदिर में घुसते समय एक युवक पकड़ा गया था। सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ में उसने बताया था कि वह सिद्धार्थनगर होते हुए नेपाल बाॅर्डर पर गया था। चाकू लेने के बाद यह किसी के यहां ठहरा भी था। किसके यहां ठहरा था, इसका पता नहीं चल सका था।
-
सीमा हैदर भी लांघ गई थी सीमा
पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर के खुनुवां बाॅर्डर के रास्ते भारतीय सीमा में प्रवेश करने की एटीएस से पूछताछ में बात सामने आई थी। सूत्रों के मुताबिक एटीएस सहित कई जांच एजेंसियां सीमावर्ती क्षेत्र में कई दिनों तक डेरा डाले हुए थीं। भारतीय सीमा में प्रवेश करने में सहयोग करने वाले मददगार के बारे में जानकारी ले रही थी। टीम को शक था कि सीमा को इस रास्ते भारतीय सीमा में प्रवेश करने के पीछे कोई स्थानीय मददगार जरूर शामिल होगा, चाहे वह नेपाल को हो या फिर भारतीय मूल का। सूत्रों की माने तो अभी तक इस मामले में छानबीन चल ही रही है।
कोरोना काल में पकड़े गए थे संदिग्ध
वर्ष 2020 में कोरोना काल में पुलिस टीम ने जगह- जगह जांच करना शुरू कर दिया। मरकज से कोरोना आने का मामला सामने आया था। जांच में पुरानी नौगढ़ के पास एक मकान में 10 से अधिक संख्या में लोग मिले थे, जो मरकज से लौटे थे। ऐसा प्रशासन ने रिपोर्ट देते हुए उन्हें क्वारंटीन कर दिया था। लगभग एक माह तक वह रहे। हालात काबू में हुआ तो पूरी जांच होने के बाद छोड़ा गया था।
-
बोले नगर के लोग
किराए पर कमरा लेने के लिए अगर कोई भी आता है तो उसका पहचान पत्र लेना चाहिए। इसके साथ पुलिस को समय-समय पर सर्वे करना चाहिए। जिससे पता चले कि शहर में कितने बाहर से आकर रह रहे हैं। कभी-कभी किराएदार ही मकान मालिक बन जा रहे हैं और मकान पर कब्जा कर ले रहे हैं। पहले से पुलिस रिकाॅर्ड में रहेगा कि किराएदार हैं तो बेईमानी नहीं कर पाएंगे।
दीपक कुमार द्विवेदी, अधिवक्ता
-
सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन को समय-समय पर किराए पर कमरा लेकर रहने वालों का सर्वे करना चाहिए। सही बात तो यह है कि महानगरों की तरहत थाने में एक रजिस्टर बना देना चाहिए। जिसमें मकान मालिक किराए पर कमरा देने के बाद आकर सूचना दे। रजिस्टर में नाम दर्ज हो, जिससे भविष्य में कोई घटना होने पर त्वरित कार्रवाई हो सके।
रिपुंजय सहाय, अधिवक्ता
-
किराएदार रखने के नियम
पुलिस विभाग के मुताबिक अगर किराएदार रख रहे हैं तो उसका आधार कार्ड और एक अन्य पहचान पत्र लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही उसकी फोटो और कहां काम करता है और क्या करता है? इसके बारे में पूरी जानकारी लेते हुए रजिस्टर में दर्ज करना होता है। जिससे उसके बारे में कभी भी कोई जानकारी ली जा सके।