सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को इस वर्ष भी बारिश में पानी से गुजरकर जाना होगा। कारण बारिश से होने वाले जलभराव से निपटने की कोई व्यवस्था नहीं गई है। जबकि मानसून के दस्तक देने का वक्त आ गया है। बरसात में कॉलेज परिसर और अंदर बरामदे में नाली सही नहीं होने से डेढ़ फिट से अधिक पानी भर जाता है। जिससे मरीजों का आने-जाने में परेशानी होती है। इस वर्ष भी उन्हीं परेशानियों से जूझना मरीजों की मजबूरी रहेगी।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज पर लगभग 30 लाख की आबादी के इलाज का जिम्मा है। जनपद के हर तहसील क्षेत्रों से लोग इलाज के लिए यहां आते हैं। वहीं इमरजेंसी में नेपाल, महाराजगंज और जनपद की सीमा से सटे बलरामपुर से भी लोग इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। नियमित दो हजारों लोग इलाज के लिए आते हैं। यहां तो अन्य समस्याएं आम हैं। लेकिन बारिश के चार माह जलभराव की समस्या बहुत ही कष्टदायी होती है। चार से छह घंटे की बारिश में इमरजेंसी परिवार में लगभग दो फिट पानी भर जाती है। जिसको निकलने में 12 घंटे से अधिक का वक्त लग जाता है। इस दौरान इलाज के लिए आने वाले लोग मरीजों को स्ट्रेचर के बजाय कंधे पर या टांग कर लेकर आते हैं। क्योंकि पानी में बाइक और एंबुलेंस भी सड़क पर खड़ी करनी पड़ती है। कमोबेश यही हाल ओपीडी गेट का भी रहता है। जलभराव के कारण ओपीडी में जाने के लिए लोगों को मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं अंदर आंगन में लगभग डेढ़ फिट पानी भर जाता है। यहां पानी निकलने में 12-18 घंटे तक लग जाते हैं। जलभराव के दौरान मरीजों को एक्स-रे, सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड के लिए घूमकर बरामदे में होकर जाना पड़ता है। यह समस्या एक या दो दिन नहीं, बल्कि चार माह की बारिश में आए दिन मरीजों को झेलरी पड़ती है। इसके पीछे सबसे बड़ा का कारण है कि जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है। जो नालियां है जाम हो चुकी हैं। उनकी समय रहते सफाई नहीं की जाती है। जैसा की इस वर्ष भी देखने को मिल रहा है। इमरजेंसी, ओपीडी वार्ड के सामने नालियां चोक हैं।
जलनिकासी के लिए नाली बनी हुई है। पिछले वर्ष नए भवन के निर्माण के कारण कई स्थानों पर नाली जाम थी। जो इस बार साफ हो गई है। वहीं इमरजेंसी और ओपीडी के सामने की नाली को साफ कराया गया है। फिर उसे साफ करवाया जाएगा।
- डॉ. एके झा, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज