- धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे के शोर से बढ़ जाती है मरीजों की परेशानी, कोई रास्ता बदल लेता, कोई खुद को कमरे में कर लेता है बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। धार्मिक कार्यक्रमों में अनियंत्रित डीजे के शोर से लोगों की धड़कनें बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि मूर्ति पूजा पंडाल बनने से पहले ही लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। परेशान लोग तेज शोर की शिकायत भी नहीं करते हैं। कोई रास्ता बदल लेता है तो कुछ लोग घर से दूर जाने के लिए भी मजबूर हो जाते हैं।
शहर के जिन इलाकों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित होती हैं या जुलूस निकलता है, वहां के लोगों का दर्द पूछिए...। तेज आवाज में बजते डीजे से लोग बीमार हो रहे हैं। लोग अपने बच्चों को कान में रूई लगाकर सुलाते हैं। पर जब डीजे का शोर होता है तो उनकी नींद अचानक खुल जाती है। यही नहीं, कंपन करती तेज आवाज से लोगों के किचन के बर्तन तक गिर जाते हैं।
हृदय रोगियों के लिए तो समय काटना मुश्किल हो जाता है। इन समस्याओं को झेलते हुए अब लोग जागरूक होने लगे हैं। सभी चाहते हैं कि यह शोर बंद हो। तेज आवाज में डीजे बजने से खासकर उन लोगों को समस्याएं होती हैं, जो पहले से बीमार हैं और उनका उपचार चल रहा है।
शहर के पुरानी नौगढ़ स्थित वृद्धा आश्रम में 100 बुजुर्ग रहते हैं। आश्रम के प्रबंधक सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि जब भी उधर से काई जुलूस गुजरता है तो बीमार बुजर्गाें की तकलीफ बढ़ जाती है। वे लोगों से आग्रह करते हैं कि वृद्धा आश्रम के सामने से गुजरते हैं तो आवाज कम कर दें और जल्द आगे निकल जाएं। आजादनगर के शाहरुख का कहना है कि एक बार उन्होंने डीजे के शोर पर टोका तो कमेटी वालों को बुरा लगा।
रास्ते में भी बढ़ जाती है धड़कन
शहर के केदारनाथ जायसवाल बताते हैं कि जुलूस में तेज डीजे बज रहा हो और वे रास्ते से गुजर जाएं तो उनकी धड़कन बढ़ जाती है। यही कारण है कि जिधर डीजे का शोर होता है, उधर से दूर चले जाते हैं। जिधर से जुलूस जाता है, उधर का रास्ता बदलकर जाते हैं, भले ही 4-5 किमी दूर बढ़ जाए।
डीजे बजता है तो छोड़ देते हैं घर
शास्त्रीनगर के 40 साल के गणेश ने बताया कि वह किडनी और हार्ट की दवा खाते हैं। गणेश पूजा में डीजे का शोर सहन नहीं कर पा रहे थे तो रिश्तेदार के घर चले गए थे। समिति वालों को टोकते थे तो कुछ देर आवाज कम कर देते थे, लेकिन कुछ देर बाद फिर तेज आवाज हो जाती थी तो धड़कन बढ़ जाती थी।
वाल्मीकि नगर की तारा देवी बताती हैं कि उन्हें शुगर, ब्लड प्रेशर और हार्ट से संबंधित बीमारी है। तेज आवाज बर्दाश्त नहीं होती है। पूजा में आवाज इतनी तेज होती है कि तबीयत खराब हो जाती है। डीजे का तेज शोर का सुनकर सीने में दर्द होने लगता है। यही कारण है कि तेज आवाज होता है तो वह खुद को कमरे में कैद रखती हैं ताकि आवाज का असर कम हो।
शोर सुनकर शुरू हो जाता है सिरदर्द
बेलहिया चौराहे के पास रहने वाली गुड़िया ने बताया कि जुलूस या प्रतिमा विसर्जन के बाद डीजे बजना बंद हो जाता है तब भी इसका असर चार से पांच दिनों तक रहता है। सिरदर्द से परेशानी होती है। कई दिनों तक नींद नहीं आती है। कभी-कभी तो नींद की गोली खानी पड़ती है, तब जाकर रात गुजर पाती है। जब डीजे बजता है तो किचन में रखे बर्तन गिर जाते हैं। बताया कि गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान उनको बुखार था। वह दवा खाकर सोईं। रात में अचानक बर्तन गिरने से वह डर गईं। इसी मोहल्ले के अखिलेश प्रताप ने बताया कि डीजे बजने पर उनको चक्कर आ जाता है। इसलिए वह घर से बाहर नहीं निकलते हैं।
तेज ध्वनि से खराब होती हैं कान की नसें, तनाव और एंजाइटी का बनता है कारण
सिद्धार्थनगर। सड़क से लेकर घरों तक में बढ़ता शोर मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। 40 से 50 डेसिबल के बीच का शोर कान की नसों को खराब कर देता है। इसकी वजह से चिड़चिड़ापन और तनाव होता है, जो बाद में एंजाइटी, ब्लड प्रेशर व तनाव का कारण बनता है। 50 डेसिबल से अधिक शोर बर्दाश्त करना मुश्किल होता है। आजकल सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज वाले साउंड बॉक्स व डीजे का चलन बढ़ रहा है। इसका आम आदमी के जीवन पर गहरा असर हो रहा है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एसके शर्मा बताते हैं कि 20 से 30 डेसिबल के बीच की आवाज स्पष्ट सुनाई देती है। कहा कि इससे दिक्कत नहीं होती, लेकिन 40 से 50 डेसिबल तक का शोर इंसान को परेशान करने लगता है।
कोट
शांति समिति की बैठकों में लोगों से अपील की जा रही है कि धार्मिक कार्यक्रमों में तेज स्वर में डीजे न बजाएं। किसी शिकायत या पुलिस की गश्त के दौरान तेज आवाज में डीजे बजते हुए पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
-अखिलेश वर्मा, सीओ सदर