जिले में 10-15 प्रतिशत फसल का हुआ नुकसान, कहीं-कहीं पक चुकी फसल, अब काटने में होगी दिक्कत
जिले में डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर हुई धान की खेत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एकाएक बदले मौसम ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। सोमवार रात आई आफत की आंधी और बारिश ने खेत में खड़ी धान की फसल को धराशायी कर दिया। गनीमत रही कि बारिश और आंधी का असर कहीं कम तो कहीं अधिक था। नहीं तो बड़ा नुकसान होता। फिर भी जिले में करीब 20 प्रतिशत फसल के नुकसान होने का अनुमान है। रात में हवा और बारिश से चिंतित किसान नुकसान की आंशका के बीच करवट बदलते रहे, सुबह खेत में पहुंचे तो जमींदोज हो चुकी फसल को देखकर परेशान हो गए। बारिश से फसल के सड़ जाने की आशंका से किसान चिंतित हैं। उनका कहना है कि प्रकृति हमेशा किसी न किसी प्रकार से उनकी कमर तोड़ती है।
नेपाल से सीमा से लगने वाले सिद्धार्थनगर की पहचान प्रदेश के तराई जनपद के रूप में की जाती है। यहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है। इसी पर किसानों के बच्चों की पढ़ाई, दवा और अन्य कार्य निर्भर है। किसान मुख्य रूप से धान और गेहूं दो प्रकार की फसल लगाते हैं। लेकिन प्रकृति हर बार किसानों पर आफत बनकर टूटती है। कभी बाढ़ तो बेमौसम बारिश और अति ओलावृष्टि से किसानों की फसल नष्ट हो जाती है। जैसा की सोमवार रात को हुआ। रात में तकरीबन सात बजे आंधी के साथ दो घंटे तक बारिश हुई। तेज हवा के कारण धान की फसल को बड़ा नुकसान हुआ। सुबह किसान जब खेत में पहुंचे तो धराशायी हो चुकी फसल देखकर उनके होश उड़ गए। जमीन पकड़ चुकी फसल को उठाकर किसान निहारते हुए नजर आए। उनका कहना था कि बेमौसम बारिश ने उनका बहुत नुकसान कर दिया। आंधी में फसल गिरती तो किसी तरह से कट जाता, लेकिन बारिश होने से पक चुका धान सड़क जाएगा। वहीं, जिनमें अभी तक बाली नहीं निकला है, वह उसमें उत्पादन आधा हो जाएगा और नीचे की फसल सड़ जाएगी। किसान बारिश से चिंतित हैं।
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सुबह फसल देखा तो नम हो गईं आंखें
सिद्धार्थनगर। सोहना क्षेत्र में रात में आई तेज आंधी और बारिश कई सौ बीघा धान की फसल गिरकर नष्ट हो गई। डुमरियागंज क्षेत्र के ग्राम मल्दा के बड़े किसान भगवान दास चौधरी, पप्पू चौधरी, रामदीन चौधरी, इदरीश और राम आशीष चौधरी से बात की गई तो उनका कहा था कि इतनी मेहनत कर के धान की फसल की रोपाई, खाद बीज बीच में बारिश न होने से पंपिंग सेट से पानी चलाया गया। फसल तैयार हो गई थी। लेकिन रात में आंधी और बारिश ने फसल चौपट कर दिया है।
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पकने से पहले ही गिर गई फसल
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में सोमवार रात आई आंधी और बेमौसम बरसात ने किसानों की खून पसीने से तैयार धान की फसल को क्षति पहुंचाया है। खेतों में पककर तैयार होने की कगार पर पहुंची धान की फैसल खेतों में गिर गई। जिससे उसके नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों ने नुकसान हुई फसल का उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बैदौलागढ़, शाहपुर, औसानपुर, महुआ खुर्द, हल्लौर, जाखौली, अरनी, शिकहरा, जबजौआ, बभनी माफी, रेहरा, गौवहनिया राज, वासा लटिया आदि गांवों में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। क्षेत्र के सोहन, अकबर अली, अकबर अहमद, अब्दुल वाहिद, द्वारिका, लालमन, इद्रीश, जयकरण आदि किसानों ने कहा कि बेमौसम बारिश से तैयार फसल खेतों में गिर गई है, जिससे काफी नुकसान होगा। सरकार नुकसान हुई फसल का सर्वे करा कर उचित मुआवजा दें।
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धान ही नहीं, अन्य फसलों को भी नुकसान
बिस्कोहर। कड़ी मेहनत से तैयार धान की फसल के लिए सोमवार शाम हुई बारिश मुसीबत बन गई। तेज हवा के साथ हुई बारिश से सैकड़ों एकड़ फसल खेतों में बिछ गई। पानी भरने से अब फसल सड़ऩे की आशंका है। जिन खेतों में बालियां निकल आईं हैं, दाना काला पड़ जाएगा। ज्वार, काला तिल, उड़द की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। बिस्कोहर निवासी किसान हरिचंद्र साहू, भरत यादव, गोमती, हरीराम, तुलसीराम ने बताया कि बारिश से ज्यादा नुकसान अगेती फसल को हुआ है। इन खेतों में बालियां निकल आईं थीं। इस वजह से लाक की लंबाई भी ज्यादा थी। तेज हवा के साथ बारिश से पूरी फसल खेतों में बिछ गई। खेत में पानी भी भरा हुआ है। ऐसे में लाक सड़ जाएगा। बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। आंधी की तीव्रता इतनी तेज थी कि लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर भागते नजर आए। आसमान में बिजली कड़कने से लोगों की धड़कनें बढ़ गईं। धूल के साथ कूड़ा करकट लोगों के घरों में घुस गया।
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जिले में इतने रकबे पर होती है धान की खेती
जिले में लगभग 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी और खरीफ की खेती होती है। इसमें धान और गेंहू के अलावा किसान सहायक फसल जैसे उड़द, तिल, मक्का, बाजार, अरहर, मूंग की खेती करते हैं। हालांकि इसका रकबा बहुत कम होता है। धान की फसल बड़े पैमाने पर होती है। तकरीबन 1.45 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती हुई है। अनुमान पर गौर करें तो जिले में 10-15 प्रतिशत फसल के नुकसान का अनुमान है।
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कालानमक धान की फसल पर भी असर
बारिश के साथ आंधी से कालानमक धान की फसल पर बुरा असर पड़ा है। कारण उसका कद काफी बड़ा होता है। इसलिए तेज हवा चलने कारण यह गिर जाता है। आंधी में इस पर काफी असर पड़ा है। अभी बाली भी नहीं निकली है। इसलिए उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। ऐसा किसानों का कहना है।
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दावा करें किसान
फसल बीमा कराने वाले किसान 72 घंटे के भीतर कृषि विभाग के पोर्टल पर फसल क्षति के संबंध में आवेदन कर सकते हैं। फसल की फोटो सहित किसानों को पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसके बाद बीमा कंपनी, राजस्व, कृषि विभाग की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी। इसके बाद रिपोर्ट तैयार करेगी और उसी के हिसाब से क्षति का मुआवजा मिलेगा।
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बोले अधिकारी
फसल क्षति का अभी तक कोई आकलन नहीं हुआ है। बीमा कराने वाले किसान कृषि विभाग के पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद जांच करके रिपोर्ट तैयार होगी और किसानों क्षति के हिसाब से बीमा कंपनी से मुआवजा दिलाया जाएगा।
मो. मुज्जामिल, जिला कृषि अधिकारी सिद्धार्थनगर