सिद्धार्थनगर। दिव्यांगजन विभाग की ओर से दिव्यांगों को थेरेपी के जरिए लाभ दिलाने के लिए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में संचालित दिव्यांग पुनर्वास केंद्र कई साल से बंद है। इसके बंद होने से मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि जनपद में तीन हजार से अधिक दिव्यांग पंजीकृत हैं।
दिव्यांगों को अच्छा जीवन देने और समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार की ओर से उन्हें कई प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। इसमें सरकारी योजनाओं के जरिए उन्हें सीधा लाभ दिया जा रहा है। कम प्रतिशत वाले दिव्यांगजनों को थेरेपी के जरिए सही करने के लिए जिला अस्पताल में छह वर्ष पहले दिव्यांग पुनर्वास केंद्र खोला गया था। प्लास्टर रूम के बगल में स्थित इस केंद्र में थेरेपी चिकित्सक सहित पांच स्टाफ तैनात किया गया था। जो कमजोर हाथ, कमजोर पैर और कम काम करने वाले अंगों की थेरेपी करते थे, जिससे मरीज सही हो सके। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर सहायक उपकरण उपलब्ध करवाते थे। कोरोना से पहले ही केंद्र बंद हो गया। इसके बाद से आजतक नहीं खुला है, जिससे दिव्यांगजनों को सहूलियत नहीं मिल पा रहा है। जबकि जनपद में तीन हजार से अधिक दिव्यांग पहले से हैं। कमजोर अंग वाले दिव्यांग पाए जा रहे हैं। ऐसे भी मरीज हैं, जो थेरेपी के जरिए सही हो सकते हैं पर केंद्र बंद होने से उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है।
यदि यह केंद्र संचालित होता तो हर दिन 15-20 मरीजों को राहत मिलती, लेकिन सरकारी स्तर पर सुविधाएं नहीं होने के कारण जरूरतमंद लोगों को निजी अस्पतालों में जेब ढीली करनी पड़ रही है।
इस संबंध में जिला दिव्यांगजन अधिकारी संदीप मौर्य ने बताया कि अभी वह नये आए हैं। इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है।