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Siddharthnagar: सरकारी अस्पताल में दवाओं की किल्लत, एक महीने से दवाएं नहीं भेज रहा UP मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन

Thu, 11 Aug 2022 10:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।

सार

जिला अस्पताल के स्टोर में 110 दवाइयों की सूची में 15 दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, कुछ दवाइयों का स्टॉक चार दिन का है तो कुछ दवाओं के एक सप्ताह या दस दिन में समाप्त होने का अनुमान है। एक माह से दवाएं नहीं आने के कारण स्टोर से दवा निरंतर कम होती जा रही हैं।
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जिला अस्पताल में दवाओं के लिए कतार में खड़े लोग। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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विस्तार
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल में दवाओं की कमी से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। सरकारी अस्पताल में निशुल्क इलाज कराने आने वाले मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन से एक माह से दवाएं नहीं मिल रही हैं, इस कारण अस्पताल के मेडिकल स्टोर में दवाइयों की कमी होती जा रही है। फार्मासिस्टों के अनुसार, यदि दस दिन और आपूर्ति नहीं हुई तो समस्या गंभीर हो जाएगी।

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जिला अस्पताल के स्टोर में 110 दवाइयों की सूची में 15 दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, कुछ दवाइयों का स्टॉक चार दिन का है तो कुछ दवाओं के एक सप्ताह या दस दिन में समाप्त होने का अनुमान है। एक माह से दवाएं नहीं आने के कारण स्टोर से दवा निरंतर कम होती जा रही हैं। ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श लेकर स्टोर काउंटर पर जाने वाले मरीजों को पर्ची पर लिखी सभी दवाइयां नहीं मिल रही हैं, जबकि डॉक्टर भी एक दवा के स्थान पर उसी से मिलते-जुलते रसायन वाली दवाएं लिख रहे हैं।

मेडिकल स्टोर में एंटीबॉयोटिक एमॉक्सीक्लेव 625 एमजी, एलर्जी की दवा सेट्रिजिन एवं दर्द निवारक डाइक्लोफेनिक टैबलेट नहीं है। इसी प्रकार एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन की भी कमी है। उल्टी-दस्त के सीजन में अस्पताल में डीएनएस की कमी हो गई थी, जिसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज के टेंडर रेट के अनुसार मेडिकल कॉलेज ने खरीदा है।
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एंबुलेंस भेजा, मिली मात्र 50 हजार रुपये की दवाइयां
दवाओं के लिए मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन लखनऊ एंबुलेंस भेजी गई थी। मात्र 50 हजार रुपये की दवाएं मिलीं। कारण कि कारपोरेशन की ओर से पहले 24.50 लाख रुपये की दवाएं दी जा चुकी हैं। नियम का हवाला देते हुए वहां से 25 लाख रुपये से अधिक की दवाएं देने से मना कर दिया गया।

मेडिकल कॉलेज ने स्थिति से निपटने से निपटने के लिए टेंडर रेट के अनुसार करीब 13 लाख रुपये की दवाइयों का आर्डर दिया है, लेकिन उसकी आपूर्ति भी फिलहाल नहीं हुई है। मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य एवं जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. एके झा ने बताया कि दवाओं की आपूर्ति के लिए पत्र भेजा गया है। ओपीडी में 15 प्रकार की दवाइयां नहीं हैं, भर्ती मरीजों के लिए भी कुछ दवाइयां समाप्त हो गई हैं।

मेडिकल स्टोर में डीएम ने किया निरीक्षण
जिलाधिकारी संजीव रंजन ने बुधवार सुबह संयुक्त जिला अस्पताल में सेंट्रल मेडिकल स्टोर में निरीक्षण करके दवाइयों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने स्टोर में करीब एक घंटे तक जांच की और दवाइयों के रख-रखाव एवं लेखा-जोखा के बारे में निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने ओपीडी में साफ-सफाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने ओपीडी में डॉक्टरों के नाम और ड्यूटी संबंधी सूची चस्पा करने के निर्देश दिए।

 
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बाहर से दवाएं खरीदनी मजबूरी
बस्ती के अहिरौली से आया हूं। त्वचा रोग से परेशान हूं। डॉक्टर ने जो दवाएं लिखी थी, वे स्टोर में नहीं मिलीं। बाहर के मेडिकल स्टोर से 180 रुपये की दवाएं खरीदनी पड़ी। -चंद्रेश
मेरे पैर में सूजन है। अस्पताल में पर्चे पर डॉक्टर ने चार प्रकार की दवाएं लिखी हैं। उसमें दो प्रकार की ही दवाएं मिली हैं। 280 रुपये की दवाएं निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ीं। -भगवान दास, धेंसा
पत्नी की दवा करने जिला अस्पताल में आया हूं। आंख की बीमारी की पूरी दवा नहीं मिली, इस कारण 130 रुपये की दवा बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदा हूं। -बबलू
शहर के मुड़िला से दस्त और पेट दर्द की शिकायत लेकर आए थे। डॉक्टर ने पर्ची पर जितनी दवाएं लिखी थीं, सभी नहीं मिल पाईं। बाहर से 198 रुपये की दवाएं खरीदनी पड़ी। एक घंटे लाइन में लगे थे, लेकिन पूरी दवाएं नहीं मिलीं। -शफीक
जिला अस्पताल के स्टोर में पर्याप्त दवाइयां नहीं आ रही हैं। इस मामले में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को पत्र भेजा जाएगा। दवा की कमी से इलाज प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। अस्पताल में व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। -संजीव रंजन, जिलाधिकारी
 
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