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बेहोशी के डॉक्टरों की कमी से टलने लगी सर्जरी

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जिला अस्पताल के ओटी के बाहर खड़े तीमारदार। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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बेहोशी के डॉक्टरों की कमी से टलने लगी सर्जरी
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जिला अस्पताल में सात की जरूरत, बेहोशी के हैं तीन डॉक्टर, एक सप्ताह बाद बचेंगे सिर्फ दो
सिद्धार्थनगर। संयुक्त जिला अस्पताल में निश्चेतना विशेषज्ञ (बेहोशी) डॉक्टरों की कमी से मरीजों का दर्द लंबा खिंच रहा है। पहले से निर्धारित सर्जरी टालने की नौबत आ रही है। फिलहाल पांच ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में तीन बेहोशी के डॉक्टर हैं। एक सप्ताह बाद एक डॉक्टर की संविदा समाप्त हो जाएगी। जब दो डॉक्टर बचेंगे तो मरीजों की परेशानी और बढ़ेगी।
संयुक्त जिला अस्पताल को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन बेहोशी के डॉक्टर कम होने से सर्जरी टालनी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पताल में बेहोशी के सात डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन एक सप्ताह बाद दो डॉक्टर ही रहेंगे।
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जिला अस्पताल में जनरल सर्जरी, आर्थोपेडिक, गॉयनिक, ईएनटी एवं आई ओटी में दो या तीन डॉक्टरों की ही उपलब्धता है। ऐसी स्थिति में जब दो ओटी में सर्जरी होती तो अन्य ओटी के डॉक्टरों को बेहोशी के डॉक्टर का इंतजार करना पड़ता है। इमरजेंसी या स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में इमरजेंसी सर्जरी के लिए भी बेहोशी के डॉक्टर की ड्यूटी लगाई जाती है। जिला अस्पताल में औसतन प्रतिदिन 12 से 15 मेजर एवं 20 से 25 माइनर सर्जरी होती है। जिला अस्पताल के बेहोशी के डॉ. अवधेश कुमार का स्थानांतरण हो गया। जबकि, मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर के हट जाने के बाद दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
तीन मरीजों की टली सर्जरी
माड्यूलर ओटी में सोमवार को बेहोशी के डॉक्टर के अभाव में हड्डी से संबंधित तीन ऑपरेशन स्थगित कर दिए गए। भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने सुबह से ऑपरेशन की तैयारी की थी। मरीजों को कुछ भी नहीं खिलाया गया था ताकि सर्जरी हो जाए, लेकिन दोपहर दो बजे उन्हें सूचना दी गई कि सर्जरी स्थगित कर दी गई है। इनमें एक मरीज के कूल्हे की हड्डी की सर्जरी होनी थी, जबकि दूसरे मरीज के पैर से रॉड निकाला जाना था। वहीं एक बच्चे की कोहनी की सर्जरी भी टालनी पड़ी।
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बेहोशी के डॉक्टरों की कमी हो गई है। बेहोशी के डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि अधिकतर सर्जरी कर दी जाए। इमरजेंसी केस आने पर पूर्व नियोजित सर्जरी टालनी पड़ जाती है। -डॉ. एके झा, प्रभारी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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