सिद्धार्थनगर।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के वीरपुर-रतनपुर गांव का चकबंदी बस्ता गायब हो गया है। चकबंदी के वर्षों बाद बस्ते की खोजबीन शुरू हुई तो राजस्व अभिलेखागार से बस्ता गायब होने पर विभाग सन्न है। इस मामले में जांच के बाद तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी (एसीओ) रामानंद यादव को दोषी पाया गया है। रामानंद की तैनात वर्तमान में संतकबीरनगर में है। इस बारे में नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। राजस्व अभिलेखागार से बस्ता गायब होने को लेकर महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
डुमरियागंज तहसील के ग्राम वीरपुर-रतनपुर टप्पा हल्लौर की चकबंदी करीब दो दशक पहले 1997-1998 में पूरी हुई थी। चकबंदी के बाद अंतिम अभिलेख तैयार कर राजस्व अभिलेखागार में जमा कराना था। पिछले दिनों राजस्व अभिलेखों की खोज शुरू हुई तो गांव का चकबंदी बस्ता गायब था। अभिलेखागार में जमा जिल्द की प्रथम प्रति पर चकबंदी लेखपाल कमला यादव, चकबंदी कर्ता रामकेर राम व सहायक चकबंदी अधिकारी रामानंद यादव के हस्ताक्षर पाए गए हैं। लिहाजा अंतिम अभिलेख तैयार कर अभिलेखागार में जमा कराने के लिए सहायक चकबंदी अधिकारी रामानंद यादव की जवाबदेही तय करते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच कर रहे डुमरियागंज के सहायक चकबंदी अधिकारी अकबाल मोहम्मद ने तत्कालीन एसीओ रामानंद यादव को नोटिस देकर एफआईआर से पूर्व स्पष्टीकरण तलब किया है। इस संबंध में डुमरियागंज के चकबंदी अधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि जिल्द की प्रथम प्रति पर एसीओ रामानंद यादव से हस्ताक्षरित है। इससे स्पष्ट है कि अंतिम समय में रिकॉर्ड उनके पास रहा है। फिलहाल, जवाब मांगा है। इसके बाद एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
बोले एसीओ : मेरे हस्ताक्षर नहीं
वर्तमान में संतकबीरनगर जिले में तैनात सहायक चकबंदी अधिकारी रामानंद यादव का कहना है कि नोटिस के साथ जो संलग्न प्रपत्र प्राप्त हुआ है, उस पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। वर्ष 1997 में पहली तैनाती डुमरियागंज में हुई थी। वीरपुर-रतनपुर का अभिलेख उनकी देख-रेख में तैयार नहीं हुआ था। फिलहाल, जवाब दिया जाएगा।