डीएम के निर्देश पर गठित दो सदस्यीय टीम ने बुधवार को नगर के अल्ट्रासांउड केंद्रों पर छापे मारी की। इस दौरान बिना पंजीयन चल रहे एक केंद्र को सील कर दिया गया। सीएमओ कार्यालय से चंद किमी दूर यह केंद्र नेशनल हाइवे कर कई महीनों से चल रहा था, विभाग इससे बेखबर था। टीम ने केंद्र को सील करते हुए संचालक को नोटिस जारी किया है। एक अन्य केंद्र पर मिली खामियों को दुरुस्त करने की हिदायत दी गई है। आकस्मिक छापेमारी से केंद्र संचालकों में हड़कंप मचा रहा। कई संचालक केंद्र बंद कर फरार हो गए।
जिले में फर्जी तरीके से अल्ट्रासाउंड केंद्रों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। इसकी शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने सदर एसडीएम योगानंद पांडेय और डिप्टी सीएमओ डॉ.विजय कुमार की दो सदस्यीय टीम गठित की थी। बुधवार की दोपहर टीम उसका रोड पर नगर से सटे बेलहिया चौराहा स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर धमकी। टीम के दोनों सदस्य आमने-सामने स्थित अलग-अलग केंद्रों में घुसे। निरीक्षण के दौरान मुस्कान अल्ट्रासाउंड केंद्र पर कोई दस्तावेज नहीं मिला। इस केंद्र का विभाग में पंजीयन भी नहीं था। केंद्र पर अल्ट्रासाउंड करने के लिए न तो कोई दक्ष चिकित्सक या कर्मचारी था और न ही समुचित संसाधन। टीम ने इसे गंभीरता से लेते हुए उसे सील कर दिया। ठीक सामने स्थित दूसरे केंद्र में भी कई खामियां मिली। रिकार्ड भी मेंटेन नहीं था। टीम ने संचालक को सुधार की हिदायत दी। एसडीएम योगानंद पांडेय ने बताया कि मुस्कान अल्ट्रासाउंड केंद्र को गड़बड़ियों के कारण सील किया गया है। विभाग को जांच कर रिपोर्ट के लिए कहा गया है। उधर, डिप्टी सीएमओ डॉ.विजय कुमार ने बताया कि अल्ट्रासाउंड केंद्र खोलने से पूर्व पंजीयन अनिवार्य है। इस केंद्र का न तो पंजीयन था और न ही कोई दस्तावेज। केंद्र को सील कर नोटिस दी गई। इसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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सरेआम चल रहा था केंद्र, बेखबर था विभाग
स्वास्थ्य विभाग की नाकामी फिर उजागर हुई है। यहां सीएमओ कार्यालय से चंद किमी दूर नियमों को दरकिनार कर अल्ट्रासाउंड सेंटर का संचालन हो रहा था, मगर जिम्मेदार बेखबर थे। बुधवार को दो सदस्यीय टीम ने जिस केंद्र को सील किया है, वह फरेंदा-नौगढ़ नेशनल हाइवे पर स्थित है। कई महीनों से इसका संचालन हो रहा था। बावजूद विभाग को कोई खबर क्यों नहीं थी, समझ से परे है। यही नहीं, जानकारों की मानें तो अल्ट्रासाउंड केंद्र के पंजीयन के बाद ही मशीनें आ सकती हैं, मगर केंद्रों पर पंजीयन से पहले मशीनें पहुंचना भी संदेह के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है।