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मुक्तांगन के ‘आंगन’ में ही बन रही शराब

Fri, 19 Feb 2016 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
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आंगन को शराब मुक्त बनाने के लिए 15 दिन पहले शुरू किया गया ऑपरेशन ‘मुक्तांगन’ असर छोड़ता नहीं दिख रहा है। कारण कि जिन महिलाओं के कंधों पर इस योजना को फलीभूत करने का जिम्मा था वही शराब बनाने के धंधे में फिर शामिल हो गई हैं।
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लेकिन कागजों और आंकड़ों में खुद की पीठ थपथपाती पुलिस इन सबसे बेपरवाह है। दफ्तरों में बैठे अफसरों को झूठे दिलासे देकर मातहत पुराने खेल में फिर से जुट गए हैं।
 अवैध कच्ची शराब से बिखरते परिवारों को संजोने के लिए जिला पुलिस ने 4 फरवरी को मिश्रौलिया थाना क्षेत्र से ऑपरेशन मुक्तांगन की शुरुआत की थी। कनकटी गांव से शुरू हुए इस अभियान के तहत ऐसे 36 दर्जन से अधिक ऐसे गांवों को चिह्नित किया गया था, जहां के आंगन शराब के लिए बदनाम है।
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ऐसे में गांवों में महिलाओं की टीम खड़ी कर जागरूकता लाने और शराब के कारोबार पर रोक लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस ने मौके पर करीब एक लाख क्विंटल शराब नष्ट कराकर यह संकेत भी दिया था कि यह अभियान सफल रहेगा। मगर गांवों के आंगन में फिर से शराब की भट्ठियां तैयार हो चुकी हैं।
यह भी अहम है कि शराब बनाने के काम में महिलाओं की भूमिका प्रमुख है। महिलाएं आंगन में शराब तैयार करती हैं और घर के पुरुष के सहयोग से बिक्री हो रही है। मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के छोटकी कनकटी, जोकइला, बोदनाताल, बहोरवां, सोनौली, चिकनडिहवा, असोगवां सहित गोल्हौरा, बांसी, जोगिया, उसका थाना क्षेत्र के कई गांवों में शराब का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
ऊंची पहुंच वालों तक जिम्मेदार पहुंच नहीं पा रहे और जहां पहुंचते हैं, वहां अनदेखी कर देते हैं। एसपी ने खुद संभाल रखी कमान ःऑपरेशन मुक्तांगन की कमान एसपी अजय कुमार साहनी ने खुद संभाल रखी है।
उनके साथ सीओ सदर अकमल खां सहित संबंधित थानों के प्रभारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बावजूद अभियान के सिरे न चढ़ने को लेकर लोगों में हैरानी बनी हुई है।
उनका कहना है कि आंगन को नशा मुक्त करने का अभियान सराहनीय था। एसपी के जुड़ने से उम्मीद थी, सपना साकार होगा, मगर अन्य अभियानों की तरह यह भी हवा हो गया है। काश, पुलिस सक्रियता दिखाती।
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