सिद्धार्थनगर।
फर्जी मस्टररोल पर हुए मनरेगा के कार्यों की जांच अभी पूरी ही नहीं हुई कि भुगतान की तैयारी शुरू हो गई है। वह भी तब, जबकि गांव के 100 से अधिक मजदूरों ने शपथ पत्र देकर कहा है कि उन्होंने इस कार्ययोजना में कोई काम ही नहीं किया, बावजूद उनके खाते में मजदूरी आ गई है। मामला लोटन ब्लॉक के सैनुआ गांव का है।
ग्राम पंचायत अंतर्गत करीब 25 लाख रुपये से पोखरा खुदाई और पुलिया निर्माण का कार्य हुआ है। इसके लिए जून-जुलाई में विभिन्न तिथियों पर मस्टररोल जारी हुए हैं। गांव के अर्जुन चौरसिया ने डीएम को सौंपे शिकायती पत्र में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर गोलमाल का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक एक जून से ही पोखरे में पानी भरा हुआ है, फिर उसकी खुदाई कैसे कर दी गई। आरोप के समर्थन में पोखरे के तत्कालीन स्थिति की तस्वीरें और वीडियो भी दी है, जिसमें पोखरा पानी से भरा हुआ है। यही नहीं मस्टररोल में शामिल सावित्री, मंजू, हरिराम सहित ऐसे सौ से अधिक मजदूरों ने शपथ पत्र देकर यह स्पष्ट किया था कि उन्होंने इस कार्ययोजना में कोई कार्य नहीं किया, बावजूद उनके खाते में पैसा आ गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए इस कार्य के भुगतान पर रोक लगाते हुए जांच शुरू कर दी गई थी। दो सदस्यीय जांच टीम ने पुलिया निर्माण की तो जांच की, लेकिन पोखरे में पानी भरा होने के कारण सत्यापन नहीं हो सका। दोबारा इस कार्य के लिए जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी और एक्सईएन सिंचाई निर्माण खंड की टीम गठित हुई। पोखरे में पानी होने के कारण इस टीम की जांच रिपोर्ट भी पूरी नहीं हो सकी है। बावजूद गुपचुप तरीके से भुगतान की तैयारी हो रही है। मनरेगा से जुड़े स्थानीय अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बिना जांच पूरी हुए भुगतान पर रोक लगाने की मांग की है। उधर, ग्राम प्रधान शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सारे आरोपों को निराधार करार दिया है। उनका कहना है कि शिकायत गंवई राजनीति से प्रेरित है। तीन बार जांच हो चुकी है। आरोप पुष्ट नहीं हुआ, अलबत्ता जांच अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण के बाद उनके कार्यों को सराहा है। अब कितनी बार जांच होगी। अप्रैल-मई में काम करने वाले मजदूरों का पैसा रुका हुआ है, वह भी कितना बर्दाश्त करेंगे। इस संबंध में मनरेगा के जिला समन्वयक उमेश चंद्र तिवारी का कहना था कि मामला संज्ञान में है। जांच चल रही है। बीडीओ लोटन को निर्देशित किया गया है कि वह अपने स्तर पर पड़ताल के बाद ऐसे मजदूरों का भुगतान कर दें, जिन्होंने वास्तविक काम किया है। जो फर्जी लगे, उनका भुगतान नहीं होगा।
विरोध-प्रदर्शन में भी साजिश का आरोप
सैनुआ ग्राम पंचायत में मनरेगा की मजदूरी भुगतान को लेकर पिछले दिनों मजदूरों ने विकास भवन पहुंचकर डीडीओ कार्यालय पर जमकर हंगामा मचाया था। डीडीओ को कमरे में बंदकर नारेबाजी की थी। इस विरोध-प्रदर्शन में भी साजिश की आशंका जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि शीघ्र भुगतान का दबाव बनाने के लिए एक पक्ष ने इस हथकंडे को अपनाया है। इससे प्रशासन पर भुगतान के लिए दबाव बढ़ेगा, लिहाजा वह जांच खारिज कर भुगतान को बाध्य होगा।