सिद्धार्थनगर।
सपा सरकार में राज्य महिला आयोग की सदस्य रहीं जुबैदा चौधरी पर एक रिटायर्ड स्वास्थ्य कर्मी ने नौकरी दिलाने के नाम पर 2.15 लाख रुपये ऐंठने का आरोप लगाया है। शनिवार को पुलिस ऑफिस पहुंचे लखनऊ के रिटायर्ड स्वास्थ्य कर्मचारी ने एएसपी को लिखित प्रार्थना पत्र देते हुए यह शिकायत की। एएसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है। उधर, आयोग की पूर्व सदस्य ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए पूरे मामले से अनभिज्ञता जाहिर की है।
मूल रूप से बांसी के डड़वार शुक्ल गांव निवासी रामचंद्र शुक्ला स्वास्थ्य विभाग में लिपिक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वे परिवार समेत लखनऊ के एलडीए कॉलोनी में रहते हैं। एएसपी को उन्होंने बताया कि एक रिश्तेदार के माध्यम से वह राज्य महिला आयोग की सदस्य जुबैदा चौधरी के संपर्क में आए। उन्होंने इंजीनियरिंग कर चुकी बेटी को रूरल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में सिविल इंजीनियर की नौकरी दिलाने का वादा करते हुए छह लाख रुपये की मांग की। पेशगी के तौर पर अगस्त, 2015 में लखनऊ के मीराबाई गेस्ट हाउस में उन्हें 2.15 लाख रुपये दिए गए। इसके बाद से ही वह लगातार चक्कर काट रहा है। न तो नौकरी दी गई और न ही रुपये लौटाए जा रहे हैं।
इस मामले में वह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय से भी शिकायत कर चुके हैं। पिछले दिनों महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्वाति सिंह से मिलकर उन्हें भी प्रकरण से अवगत कराया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसपी अरविंद कुमार मिश्र ने दोनों पक्षों को बुलाकर ऑफिस में वार्ता की। उन्होंने कहा कि मामला गंभीर है। जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस बाबत राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य जुबैदा चौधरी ने पूरे प्रकरण से अनभिज्ञता जताई। उनका कहना है कि ऐसा कोई मामला उनकी जानकारी में नहीं है।
इनसेट
एएसपी के हस्तक्षेप के बाद दिए तीन एडवांस चेक
गौर फरमाने वाली बात यह है कि पूरे मामले से अनभिज्ञता जताने वाली जुबैदा चौधरी ने एएसपी के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित को 2.15 लाख रुपये के तीन चेक भी जारी कर दिए। इन चेक पर एक साल आगे की तारीख पड़ी हुई है। दरअसल, मामला संज्ञान में आने के बाद एएसपी ने समाधान के लिए जुबैदा चौधरी को ऑफिस बुलाकर वार्ता कराई। यहां जुबैदा ने घरेलू समस्याओं का हवाला देते हुए छह माह के अंदर तीन किस्तों में धनराशि देने का वादा किया। भरोसे के तौर पर चेक देने की बात स्वीकारी। बाद में जब पीड़ित घर पहुंचा तो उसे अगस्त 2018 और मार्च और जून 2019 की तिथि के तीन चेक थमा दिए गए।