सिद्धार्थनगर। बीएसए कार्यालय में चोरी की वारदात विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। एक ओर विभाग चोरी में कुछ भी गायब न होने की बात कह रहा है। दूसरी ओर सीसीटीवी कैमरे में फाइल चोरी होने की बात सामने आ रही है। विभागीय अफसर तीन दिनों में चोरी फाइलों की लिस्ट मांग रहे है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि कहीं न कहीं विभाग चोरी की वारदात को प्रीप्लान थी और 38 बर्खास्त फर्जी शिक्षकों के मामले की जांच को भटकाने की साजिश का हिस्सा हो सकती है। सही से जांच हो तो चोरी प्रकरण में भी विभाग के कुछ कर्मी जेल जा सकते हैं। सूत्रों की माने तो पुलिस की टीम ने शनिवार को तीन लोगों को इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। कुछ सबूत भी मिले हैं। काउंसिलिंग की वजह से उन कार्रवाई थमी हुई है। बीएसए राम सिंह ने बताया कि काउंसिलिंग के बाद जांच प्रक्रिया फिर से शुरू होगी।
सीसीटीवी में कैद है फाइल बांधने का रिकॉर्ड
एक ओर बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर चोरी न होने की बात कह रहे हैं। दूसरी ओर सीसीटीवी कैमरे में फाइल बांधने तक का रिकार्ड है। इसके बाद कैमरे के तार निकाल दिए गए हैं। चोरी करने वालों को कैमरे के पल्ग का स्थान मालूम था। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसमें विभाग के कुछ कर्मी अवश्य ही शामिल हैं।
तीन कर्मियों की भूमिका सवालों के घेरे में
विभागीय सूत्रों की माने तो पुलिस अब तक जिन तीन कर्मियों से पूछताछ की है। उसमें एक कर्मी की भूमिका सर्वाधिक संदिग्ध है। उसके नेटवर्क बसपा शासन काल में ऐसे थे कि विभाग के आलाधिकारी खुद उसके चैंबर में सलाह के लिए जाते थे। इसी का नतीजा है जब भी उसका ट्रांसफर होता है, वह इसे रुकवा लेता है। वहीं एक नाम ऐसा है जो जिस जिले में रहता है, वहां उसकी भूमिका संदिग्ध रहती है। तीसरा शख्स पूर्व में फर्जी शिक्षकों के गैंग में शामिल रहा है। मौजूूदा समय में वह जनपद के दूसरे कार्यालय में तैनात है।