सिद्धार्थनगर। फर्जी दस्तावेज के सहारे शिक्षक बनाने वाले गिरोह के मास्टरमांइड राकेश सिंह ने पुलिस की पूछताछ में कई अहम राज खोले हैं। एक दिन के न्यायिक रिमांड पर गुरुवार को सदर पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी। पूछताछ में उसने चार बीएसए के अलावा एक पूर्व डायट प्राचार्य व एक लिपिक का नाम भी बताया है। साथ ही कई ऐसे लोगों के भी नाम बताए हैं, जिनकी पहुंच शासन में बहुत तगड़ी है, जो हर बार मामला उभरने से पहले ही दबा देते थे। यही वजह है कि इतने सालों से सेफ जोन में वह नौकरी करता आ रहा था और अपने लोगों को नौकरी दिलाता था।
फर्जी दस्तावेज तैयार करके शिक्षक बनाने के मामले में जांच के बाद एक साथ 38 शिक्षक को बर्खास्त हुए। इसके बाद सदर थाने में सभी फर्जी शिक्षकों के लिए केस दर्ज कराया गया। मामले की जांच सदर पुलिस के अलावा एसटीएफ भी कर रही थी। मामले में एसटीएफ ने करीब एक पखवाड़े पूर्व ही शिक्षक माफिया राकेश सिंह को गोरखपुर के बेतियाहाता कॉलोनी से गिरफ्तार किया था। एसटीएफ के पूछताछ में चार से अधिक पूर्व बीएसए के नाम सामने आए हैं। सूत्रों की माने तो राकेश सिंह ने पूछताछ के बाद बताया है कि वह अकेले इस खेल में नहीं था। चार बीएसए सहित एक पूर्व प्राचार्य भी शामिल था। इसके अलावा उसने बीएसए कार्यालय में तैनात एक लिपिक का भी नाम उगला है, जो उसके गठजोड़ में हर कदम पर साथ देता था। इसके एवज में उसे रकम मिलती थी। सूत्रों की माने तो जल्द ही पुलिस की जांच में कई लोग बेनकाब होने वाले हैं।
एसओ सदर डीसी चौधरी ने बताया एक दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई है। जांच में कई राज खुलकर सामने आए हैं।
अपने करीबियों को रेवड़ी की तरह बांटी नौकरियां
पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि चार बीएसए और एक डायट के पूर्व प्राचार्य ने अपने करीबियों को रेवड़ी की तरह नौकारियां बाटी थीं। यही कारण है कि छह माह पर बीएसए और डायट प्राचार्य की गाड़ी बदल जाती थी। साथ ही जितने लिपिक इस काम में शामिल थे, उनके पास करोड़ों की संपत्तियां बहुुत कम समय में आ गई। फिल्हाल जिस लिपिक का नाम सामने आ रहा है, उसका भी नेटवर्क बेहद तगड़ा है। यही कारण है कि वह अब तक बचता आया है।