सिद्धार्थनगर। जिले में हुई गेहूं खरीद में हुई अनियमितता की जांच शुरू हो गई है। एंटी करप्शन विभाग के निर्देश पर जिले की एक विशेष टीम रिपोर्ट तैयार कर रही है। सूत्रों की माने तो टीम के निशाने पर सबसे विवादित सचिव हैं।
गेहूं खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने कई बड़े बदलाव किए थे, बावजूद इसके बिचौलिए खरीद व्यवस्था पर हावी रहे। नतीजतन लक्ष्य के सापेक्ष जिले में 130 प्रतिशत खरीद हुई। बावजूद इसके कई किसान पंजीयन कराने के बाद भी गेहूं बेच ही नहीं पाए हैं। खरीद व्यवस्था पर बार-बार सवाल खड़े हुए और कमीशन लेकर किसानों के बजाए बिचौलियां का गेहूं खरीद करने का शासन तक शिकायत हुई। 18 जून के अंक में ‘अमर उजाला’ द्वारा ‘गेहूं खरीद लक्ष्य से 30 प्रतिशत ज्यादा, फिर भी किसान परेशान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई। इसके बाद भाकियू ने विकास भवन में एक सप्ताह तक धरना दिया। इसके अतिरिक्त अन्य संगठनों में भी शासन स्तर पर गेहूं खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत की।
शासन के निर्देश पर एंटी करप्शन विभाग ने जांच के लिए विशेष टीम को लगाया है। इसमें सबसे मुख्य टारगेट जिले के सबसे बदनाम सचिव हैं, जहां पर खरीद में सबसे अधिक सवाल उठे हैं। रिपोर्ट शासन को जाने के बाद एंटी करप्शन विभाग की टीम आगे की कार्रवाई करेगी। इस संबंध में एएसपी मुन्ना लाल सिंह ने बताया कि जांच में विभाग पूरा सहयोग करेगा।गौरतलब है कि जिले में गेहूं खरीद के लिए विभिन्न संस्थाओं के 141 क्रय केंद्र खोले गए थे। जिले को 68900 मीट्रिक टन लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष लक्ष्य से अधिक 88275 मीट्रिक टन खरीद हुई थी।
किसानों से साध रही संपर्क
टीम से जुड़े सूत्रों की माने जांच में लगी टीम गेहूं बेचने वाले किसानों की सूची लेकर उनसे संपर्क साध रही है। इसमें यह जानकारी ले रही है कि आपका गेहूं बिका है कि नहीं, आपके खेत का रकबा कितना हैं। कितना पैदा हुआ और कितना बेचा। खरीद के नाम पर कितने रुपये क्विंटल कमीशन की डिमांड की गई और कितनों दिनों तक गेहूं बेचने के लिए क्रय केंद्रों का चक्कर लगाए। उनके बताए हुए बयान को दर्ज कर रही है। इसके अलावा ऐसे किसानों पर विशेष ध्यान दे रही है, जिनका रकबा कम हैं। मगर उनके नाम से अधिक गेहूं बिका है।