फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘हलवाई की दुकान पर काम करता हूं, बुलेट कैसे दे पाता’

विज्ञापन
गुड़िया की मौत के बाद जुटे लोग। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
परसा (सिद्धार्थनगर)। हलवाई की दुकान पर काम कर परिवार का भरण पोषण करता हूं। दामाद द्वारा दहेज में बुलेट की मांग कैसे पूरी कर पाता। मार्च 2017 में इसी हाथ से गुड़िया (22) का कन्यादान किया था, आज चिता जलानी पड़ रही है। यह कहते-कहते शोहतरगढ़ थाना क्षेत्र के गोल्हौरा मुस्तकहम निवासी शेषनाथ रो पड़े। उन्हें देखकर वहां मौजूद हर किसी की आंखों नम हो गईं।
विज्ञापन


शेषनाथ ने बताया कि चार पुत्रों के बीच इकलौती बेटी गुड़िया की शादी मार्च 2017 में वीरेंद्र गुप्ता पुत्र सुखराम निवासी ग्राम अगया थाना शोहरतगढ़ के साथ हुई थी। उसे अगर मेरी बेटी को अपने पास नहीं रखना था तो हमारे पास छोड़ जाता। हम उसका पालन पोषण कर लेते। आखिर मेरी बेटी का गुनाह क्या था। बस यही कि उसका बाप गरीब था। शादी में बाइक की मांग पूरी न कर पाने के कारण पति वीरेंद्र व उसकी भाभी रीना उसे अक्सर प्रताड़ित करते थे। धीरे-धीरे उनकी मांग बुलेट तक पहुंच गई। इसकी सूचना गुड़िया ने पिता और भाई को भी दी थी। बुधवार को भी मुंबई के घाटकोपर स्थित आवास पर भी वीरेंद्र ने गुड़िया को लात-घूंसे और डंडे से पीटा था। बीच-बचाव करने पर उसने अपने पिता सुखराम को भी नहीं बख्शा था।

गौरतलब है कि गुड़िया का पति वीरेंद्र उसे लेकर मुंबई से गोरखपुर आ रही एलटीटी एक्सप्रेस से गांव आ रहा था। सफर के दौरान ही उसने गला दबाकर गुड़िया को मार डाला। ट्रेन जब कानपुर पहुंची तो शव को कब्जे में लेने के बाद शक के आधार पर जीआरपी ने वीरेंद्र को पकड़ लिया। सख्ती से पूछताछ में वीरेंद्र ने हत्या की बात स्वीकार कर ली। रविवार को जब गुड़िया का शव गोल्हौरा मुस्तकहम पहुंचा तो मायके में मातम छा गया। उन्हें देखकर पूरा गांव रो पड़ा। दोपहर करीब एक बजे राप्ती के बानगंगा घाट पर गुड़िया का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पिता ने मुखाग्नि दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें