नदी की 200 बीघा भूमि दर्ज हो गई 20 लोगों के नाम, खतौनी, खसरा नक्शा गायब होने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ तहसील के चंपापुर, ठुसुरी गांव के राजस्व अभिलेखों में बानगंगा नदी की 200 बीघा भूमि पर हेराफेरी कर नाम दर्ज कराने के मामले में जांच समिति के सदस्य गहनता से जांच करेंगे। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए समिति बनाकर जांच कराने का निर्देश दिया है।
शिकायत के अनुसार 35 वर्ष पहले चकबंदी में अधिकारियों के मिलीभगत से अभिलेखों में हेराफेरी करके बानगंगा नदी की 200 बीघा भूमि 20 लोगों के नाम, दर्ज करा दिया गया था, जांच के दौरान पता चला कि उन गांवों के खतौनी, खसरा और नक्शा ही गायब हैं। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने इस संबंध में 35 वर्ष पूर्व हुए फैसले काे निरस्त कर दिया है, जबकि उसके आगे कार्रवाई नहीं हुई है।
1985 में चकबंदी के दौरान चंपापुर और ठुसुरी गांव की कई बीघा भूमि ओवरलैप दिखाते हुए ग्राम लेदवा माफी में शामिल कर दिया गया। नदी के नाम से दर्ज इस भूमि को दूसरे गांव गजहड़ा के 20 से अधिक लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया। जांच के बाद बांसी और डुमरियागंज के चकबंदी अधिकारियों ने बताया है कि ग्राम चंपापुर में 1984 से चकबंदी शुरू हुई थी, लेकिन ग्राम के बस्ते में आधार वर्ष खतौनी, आधार वर्ष खसरा व बंदोबस्त उपलब्ध नहीं है।
इस मामले में जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने बताया कि उन्होंने इस मामले में एसडीएम एवं चकबंदी अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने जांच समिति गठित करके पूरे प्रकरण की जांच कराने का निर्देश दिया है।