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Siddharthnagar News: बाजार पर भी ठंड की मार

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ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों की खरीदारी करते लोग। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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बाजार पर भी ठंड की मार
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प्रतिदिन प्रभावित हो रहा है डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार
लोगों के घर से नहीं निकलने से कम हो गए ग्राहक
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ठंड की मार से केवल लोगों की दिनचर्या ही नहीं बदली है, बल्कि कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। अधिकतर लोगों के घरों से कम निकलने की वजह से बाजार में सन्नाटा पसरा रहता है।
दुकानदारों को इस बात की चिंता है कि यही स्थिति बनी रही तो आर्थिक नुकसान उठाना पडे़गा। उनके अनुसार जिले में प्रतिदिन डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हो रहा है। शहर में ही 50 लाख रुपये से अधिक कारोबार प्रभावित हो रहा है। ठंड भगाने में उपयोगी गर्म कपड़े और रूम हीटर, ब्लोवर और पानी गर्म करने के राड के अलावा अन्य सामानों की बिक्री बहुत कम हो रही है।
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दुकानदारों की मानें तो पहले की अपेक्षा 30 प्रतिशत भी बिकी नहीं हो रही है। कपड़े, गहने, दैनिक उपयोग की वस्तुएं, फर्नीचर आदि की बिक्री कम हो रही है। भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों की बिक्री भी न के बराबर हो रही है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल के मुताबिक जिले में प्रतिदिन 200 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
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खरमास का भी है असर
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के जिलाध्यक्ष अजय कसौधन ने बताया कि ठंड के कारण बाजार में मंदी आ गई है। खरमास की वजह से भी बाजार पर असर पड़ा है। मौसम अच्छा होता तो बिक्री पर कम असर पड़ता है।
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कोट
रूई, कंबल, गद्दा, तकिया बेचता हूं। पहले दिन भर में 20 हजार रुपये से अधिक की बिक्री हो जा रही थी। अब पांच हजार रुपये का सामान बिकना मुश्किल हो गया है।
-राकेश रस्तोगी
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ठंड से बचने में उपयोगी कपड़े ही बिक रहे हैं। कुछ सामानों की बिक्री से काम नहीं चलने वाला है। पहले 30 हजार रुपये का कारोबार एक दिन में होता है, अब 10 हजार रुपये तक बिक्री नहीं हो पा रही है।
-रमीज
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सौंदर्य प्रसाधन की बिक्री पहले की अपेक्षा 20 प्रतिशत से अधिक कम हो गई है। ें सिर्फ ऊनी कपड़े बिक रहे हैं। ग्राहकों के इंतजार में ही दिन बीत जाता है। लगातार ठंड से चिंता बढ़ रही है।
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-अमित रस्तोगी
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पहले रेलवे स्टेशन के पास कपड़े के बाजार में वाहन ले जाना मुश्किल हो जाता था। अब सड़क पर बहुत कम लोग नजर आ रहे हैं। दुकानें देर से खुल रही हैं और पहले ही बंद हो जा रही हैं।
-विकास गुप्ता
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