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Siddharthnagar News: सीएमओ ने लाइसेंस देने से खड़े किए हाथ, डीएम को भेजी चार फाइल

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सीएमओ, डिप्टी सीएमओ और निजी अस्पताल के संचालक से लेनदेन की बातचीत का वीडियो वायरल होने का मामला
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निजी अस्पतालों को लाइसेंस देने के मामले में सीएमओ ने डीएम से जांच कराने की सिफारिश की
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सीएमओ, डिप्टी सीएमओ और निजी अस्पताल के संचालक के बीच लेनदेन की बातचीत का वीडियो वायरल होने के बाद सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल ने लाइसेंस जारी करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। सीएमओ ने चार निजी अस्पतालों के लाइसेंस की फाइल को जिलाधिकारी संजीव रंजन के पास भेजा है। उन्होंने जिलाधिकारी के स्तर से जांच कराकर निर्णय करने का आग्रह किया है।

सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि अवध हॉस्पिटल बांसी, विद्या हॉस्पिटल बर्डपुर, पल्स हॉस्पिटल इटवा एवं सेवा हॉस्पिटल इटवा के लाइसेंस के नवीनीकरण की फाइल उन्होंने जिलाधिकारी को भेज दी है। सीएमओ ने आवेदन निरस्त करने की बजाए जिलाधिकारी को भेजा है। इसमें वह अवध हॉस्पिटल, बांसी भी है, जिसके संचालन और सीएमओ, डिप्टी सीएमओ के बीच लेनदेन की बातचीत का वीडियो वायरल हो रहा है। अब जिलाधिकारी की ओर जांच कराने के बाद तय होगा कि इन अस्पतालों को लाइसेंस दिया जाएगा या नहीं। सीएमओ कार्यालय में 63 निजी अस्पतालों व जांच सेंटरों के लाइसेंस के आवेदनों की जांच नहीं हो पाई है। ये आवेदन न तो खारिज हुए हैं और न ही लाइसेंस जारी किए गए है। नियम के मुताबिक तीन में लाइसेंस जारी होना चाहिए या आवेदन निरस्त होना चाहिए।
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खास होगी जांच रिपोर्ट
सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल ने जिन अस्पतालों की फाइल डीएम को भेजी है, उनमें अवध हॉस्पिटल बांसी के मानकों की रिपोर्ट खास होगी। इस रिपोर्ट में पता चलेगा कि निजी अस्पताल लाइसेंस प्राप्त करने के मानकों को पूरा कर रहा था या नहीं। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद जांच शुरू हुई तो अस्पताल संचालक ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि लाइसेंस के नवीनीकरण में सीएमओ ने पांच लाख रुपये मांगे थे, जिसमें उन्होंने डेढ़ लाख रुपये दिए थे। हालांकि, सीएमओ इस आरोप को सिरे से खारिज कर रहे हैं। संभावना है कि सीडीओ जयेंद्र कुमार एवं एएसपी सिद्धार्थ की जांच रिपोर्ट जल्द ही सामने आएगी।
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बैकडोर से चलने लगे अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों व जांच सेंटरों को सील किया है, उनमें कई संचालकों ने बिना लाइसेंस प्राप्त किए ही बैकडोर से अस्पतालों का संचालन शुरू कर दिया है। बिना मानक के अनुसार संचालित निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान तीन महिलाओं की मौत हुई तो स्वास्थ्य विभाग में ताबड़तोड़ छापा मारा गया। अब सीएमओ और डिप्टी सीएमओ अपनी कुर्सी बचाने में जुटे हैं तो अस्पताल संचालकों को दुस्साहस भी सामने आ रहा है। बर्डपुर, इटवा और शोहरतगढ़ क्षेत्र में बैकडोर से अस्पतालों के संचालन की चर्चा है।

वर्जन
सीएमओ ने निजी अस्पतालों के लाइसेंस की फाइल भेजी है, उसकी जांच कराई जाएगी। जिसका मानक पूरा होगा, उन्हें लाइसेंस जारी किया जाएगा। सीएमओ, डिप्टी सीएमओ एवं निजी अस्पताल के संचालक के बीच बातचीत का वीडियो वायरल होने की जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। जांच पूरी होने पर रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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संजीव रंजन, जिलाधिकारी


आरोप प्रत्यारोप के कारण मैंने चार निजी अस्पतालों के लाइसेंस की फाइल जिलाधिकारी को भेज दी है ताकि जिलाधिकारी के स्तर के इनके मानकों की जांच हो। मैं आग्रह करुंगा कि जिलाधिकारी की ओर से बनाई गई समिति की जांच के बाद लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो।
डॉ. बीके अग्रवाल, सीएमओ
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