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Siddharthnagar News: आरक्षण बदलने की आहट से दावेदारों के थम गए कदम

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आरक्षण बदलने की आहट से दावेदारों के थम गए कदम
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पिछड़ा वर्ग आयोग गठित होने के बाद नए सिरे से होगा सीटों का आरक्षण
जिले के सभी 11 नगर निकायों में ठंडे पड़े अध्यक्ष व सभासद पद के दावेदार
सिद्धार्थनगर। नए सिरे से प्रक्रिया शुरू होने और सीट का पूर्व निर्धारित आरक्षण बदलने की आहट के बीच नगर निकायों में अध्यक्ष और सभासद पद के दावेदार ठंडे पड़ गए हैं। नए आरक्षण में सीट दूसरे वर्ग के लिए आरक्षित होने की चर्चा से दावेदारों का चुनाव प्रचार थम गया है। साथ ही दावेदारों के मतदाताओं के हर सुख-दुख में खड़े होने की पहल में भी कमी आ गई है।
सुप्रीम कोर्ट के पिछड़ा वर्ग के आरक्षण लागू करने संबंधी आदेश के बाद प्रदेश सरकार की तरफ से आयोग गठित करने के निर्णय से नगर निकाय चुनाव टलना तय हो गया है। इसके साथ ही नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया होना तय है। इससे ठंड के बावजूद जोर-शोर से प्रचार में जुटे दावेदारों ने चुनावी सरगर्मी कम कर दी है। निरस्त हुई आरक्षण प्रक्रिया के तहत महिला के लिए आरक्षित शहर के सामान्य वर्ग के अध्यक्ष के एक दावेदार का कहना है कि अब सीट का आरक्षण बदल सकता है। अभी चुनावी कसरत करना ठीक नहीं है। बांसी नगर पालिका के एक दावेदार कहते हैं कि दूसरे वर्ग का आरक्षण होने से सारी कसरत बेकार हो जाएगी। अब दो माह से पहले चुनाव नहीं होना है। जब तक आरक्षण निर्धारित नहीं हो जाता तब तक प्रचार करने का कोई औचित्य नहीं है। डीएम संजीव रंजन ने कहा कि आरक्षण प्रक्रिया के तहत आयोग की तरफ से मिले निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा।
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अनुसूचित सीट होने की भी चर्चा
जिले के सभी 11 नगर निकायों में इस बार कोई नगर निकाय अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं हुई थी। पहले से ही स्थापित शहर समेत छह नगर निकायों में अब तक कोई नगर निकाय अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित नहीं हुई है। अब 11 नगर निकायों में किसी एक का अध्यक्ष पद अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित होने की चर्चा राजनीतिक गलियारे में सुनाई पड़ रही है। इस वर्ग के दावेदार भी सीट आरक्षित होने पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी करते दिख रहे हैं।
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