- 28 अक्तूबर को गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार इस साल का अंतिम
चंद्रग्रहण शरद पूर्णिमा के दिन 28 अक्तूबर को लग रहा है। यह पूरे भारत में दिखाई देगा। पंचांग के अनुसार अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि पर साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह कई दृष्टिकोण से हानिकारक साबित हो सकता है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य योगेश पांडेय ने बताया कि 28 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा की रात्रि में खंड ग्रास चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह पूरे भारत सहित अन्य देशों में भी दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण 28 अक्तूबर की रात्रि 1 बजकर 05 मिनट से रात्रि के 2 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
उन्होंने बताया कि ग्रहण स्पर्श काल से नौ घंटे पहले ही लग जाएगा। बालक, वृद्ध और असहाय लोगों को ग्रहण के नियमों का पालन नहीं करना है। ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से सावधानियां बरतनी चाहिए। ग्रहण लगने के नौ घंटे पहले से ही नाभि के चारों तरफ गाय के गोबर से गोलाकार लेप करने के साथ पूरे समय भगवान का भजन-कीर्तन करना चाहिए।
इंसर्ट-
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें
सिद्धार्थनगर। आचार्य योगेश पांडेय ने बताया कि चंद्र ग्रहण लगने के नौ घंटे पहले से ही सूतक लग जाता है। सूतक लग जाने पर मंदिर में प्रवेश नहीं करना चाहिए और प्रतिमा को भी नहीं छूना चाहिए। बालक, वृद्ध, रोगी को जरूरी होने पर खाद्य पदार्थ दिया जा सकता है, जबकि अन्य लोगों को कुछ भी खाने से परहेज करना चाहिए। ग्रहण काल में दान, जप, तंत्र, मंत्र की सिद्धि का विशेष फल मिलता है।
एक माह में दो बार ग्रहण लगना हानिकारी
ज्योतिषाचार्य आचार्य योगेश पांडेय ने कहा कि एक महीने में दो बार ग्रहण लगना शुभकारी नहीं होता है।
अक्तूबर
माह में सूर्य ग्रहण 14 अक्तूबर को लग चुका है जबकि 28 अक्तूबर को चंद्रग्रहण लगने वाला है। यह योग आपदा, जनहानि, भूकंप, दुर्घटना, अग्निकांड जैसी प्राकृतिक आपदाओं का संकेत देता है। देश की राजनीति में भी उथल-पुथल देखने को मिल सकता है। इसके अलावा देश में आंदोलन, हिंसा, धरना-प्रदर्शन, हड़ताल आदि भी देखने को मिल सकती हैं।