बच्चों के स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु के लिए महिलाएं रखेंगी 36 घंटे उपवास
20 नवंबर को 6:47 पर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पारण करेंगी महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। घर से घाट तक छठ पर्व की तैयारियां की जा रही हैं। शुक्रवार से चार दिवसीय छठ पर्व का शुभारंभ होगा। पहले दिन नहाय खाय की धार्मिक परंपरा के साथ पर्व शुरू होगा। छठ पर्व के लिए बाजारों में रौनक दिख रही है। केरल, बंगलूरू सहित दक्षिण भारत से फलों की खेप आ रही है। घरों में छठ उपासना का धार्मिक उत्सव शुरू हो गया है। छठ पूजा मनाने के लिए जिले के काफी संख्या में प्रवासी घर आने लगे हैं, जबकि प्रशासन भी तैयारियाें में जुट गया है।
शहर में जमुआर घाट पर छठ पूजा होती है। नगर पालिका परिषद ने घाट की सफाई करा दी है। थ्रीडी कलाकृतियां बनाई जा रही हैं। पुल के नीचे वेदी बनाने और रंगने का काम हो रहा है। दो दिन में घाट की तस्वीर और बदल जाएगी। वहीं, लोगों की सुविधा के लिए टेंट भी लगाए जा रहे हैं, जबकि पुलिस ने भी छठ पूजा में जाम को नियंत्रित करने की तैयारी की है।
सीओ अखिलेश वर्मा ने बताया कि छठ पूजा में काफी संख्या में लोग जमुआर घाट पर जाते हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था की जाएगी ताकि हाईवे पर वाहनों के पहिये थमने की नौबत न आए।
छठ पूजा का पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। इस दिन छठी मइया की पूजा कर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। महिलाएं बच्चों के स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु के लिए 36 घंटे उपवास करती हैं।
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि पार्वती का छठा रूप, भगवान सूर्य की बहन छठी मैया को पर्व की देवी रूप में पूजा जाता है। यह चंद्र के छठे दिन काली पूजा के छह दिन बाद मनाया जाता है। त्योहार का अनुष्ठान कठोर होता है। इसमें स्नान, उपवास और पीने के पानी (वृत्ता) से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना, और प्रसाद (प्रार्थना प्रसाद) और अर्घ्य देना शामिल है। प्रकृति का छठे अंश होने के कारण इस देवी का नाम षष्ठी रखा गया। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, षष्ठी देवी बालकों की रक्षा व आयु प्रदान करती है।
स्कन्द पुराण में इन्हें ही देवी कात्यायनी कहा गया है। षष्ठी तिथि शिशुओं के संरक्षण व संवर्धन की देवी हैं। इनकी विशेष पूजा षष्ठी तिथि को की जाती है। इस वर्ष छठ पर्व की पूजा 17 नवंबर से शुरू हो रही है, जिसका समापन 20 को होगा।
नहाय-खाय तिथि
नहाय-खाय 17 को होगा। इस दिन सूर्योदय 06:45 बजे और सूर्यास्त शाम 05:27 बजे होगा। नदी में स्नान के बाद नए वस्त्र धारण कर शाकाहारी भोजन ग्रहण किया जाएगा। इस दिन व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद ही घर के बाकी सदस्य भोजन ग्रहण करते हैं।
खरना तिथि
खरना छठ पूजा का दूसरा शाम 05:26 बजे होगा। दिन होता है। इस दिन सूर्योदय सुबह 06:46 बजे और सूर्यास्त शाम 05:26 बजे होगा। खरना के दिन व्रती एक समय मीठा भोजन करते हैं। इस दिन गुड़ से बनी चावल की खीर खाई जाती है।
संध्या
अर्घ्य का समय छठ पूजा का संध्या अर्घ्य, तीसरे दिन सूर्यास्त शाम 05:26 बजे होगा।
उगते सूर्य को अर्घ्य
20 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सूर्योदय सुबह 06:47 बजे होगा। इसके बाद हो 36 घंटे का व्रत समाप्त होता है। अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद का सेवन करके व्रत का पारण करती हैं।
छठ पर्व के लिए घाटों पर शुरू हो गई सजावट
डुमरियागंज। डुमरियागंज स्थित राप्ती नदी घाट पर साफ-सफाई और सजावट का काम पूरा कर लिया गया है। शुक्रवार की देर शाम से छठ पूजा स्थल पर व्रती महिला श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो जाएगी। राप्ती नदी तट पर नगर पंचायत व्यापक स्तर पर साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की गई है। देर शाम तक छठ पूजा को लेकर पूजा स्थल (वेदी) को सजाने संवारने में लोग जुटे थे। इस दौरान पंडित राकेश शास्त्री, नसीम अहमद, आकाश गुप्ता, फैजान अहमद, महंत मिश्रा, विकास, अर्पित, शबलू आदि मौजूद रहे
छठ घाट की तैयारियों का लिया जायजा
बर्डपुर। छठ पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए गुरुवार को अध्यक्ष प्रतिनिधि जावेद आलम उर्फ चुन्ने ने छठ घाट का निरीक्षण किया। जरूरी निर्देश देते हुए कहा साफ सफाई में तेजी लाई जाए। विद्युत व्यवस्था, सजावट का कार्य पूर्ण किया जाए। अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार ने कहा कि मंदिर व आसपास की साफ-सफाई व रंगरोगन का कार्य लगभग पूरा हो गया है। तालाब के घाट की सफाई व घाट तक आने वाले मार्ग का मरम्मत कराकर लाइट की व्यवस्था की जा रही है। इस दौरान सूरज प्रताप सिंह, सफाई नायक निहाल अहमद, सभासद संदीप मोदनवाल, विपिन रावत, घनश्याम जायसवाल सहित तमाम लोग मौजूद रहे।