संवाद न्यूज एजेंसी
उसका बाजार। चार दिवसीय लोक आस्था का छठ महापर्व शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ। छठ पूजा में नहाय-खाय का विशेष महत्व होता है।
इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं सुबह स्नान आदि कर नए और साफ वस्त्र पहनती हैं। इसके बाद भगवान सूर्य के साथ अपने कुलदेवता और कुलदेवी की पूजा करने के बाद बिना लहसुन, प्याज से बना सात्विक भोजन करती हैं।
बता दें कि छठ का व्रत पूरे चार दिनों तक मनाया जाता है। 17 नवंबर से शुरू हुई छठ पूजा 20 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगी।
आचार्य अवधेश द्विवेदी ने बताया कि नहाय-खाय के दिन सबसे पहले पूरे घर की साफ-सफाई कर लें। अरवा चावल और लौकी, चने की दाल से बिना लहसुन, प्याज के प्रयोग से बने भोजन को भोग लगाने के बाद ही खाएं। व्रती के भोजन करने के बाद ही घर के बाकी सदस्य भोजन ग्रहण करें।
छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा का यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु, पारिवारिक सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए किया जाता है। छठ व्रत में व्रती महिलाएं करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत करती हैं। छठ पूजा का यह त्योहार पूरे चार दिनों तक मनाया जाता है।
छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय होता है। दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और उसके अगले दिन अरुणोदय काल में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।