आस्था व उत्साह पूर्वक मनाया गया करवा चौथ
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। करवा चौथ व्रत में बुधवार को सुहागिनों ने निर्जला व्रत रखा। देर शाम चंद्र दर्शन हुए तो सुहागिनों ने परंपरागत तरीके से पति का चेहरा चलनी में देखकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। चांद दिखते ही शोहरतगढ़ कस्बे में लोगों ने पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया।
करवा चौथ व्रत में सुहागिनों ने चंद्रमा के दर्शन से पहले ही शृंगार करके पूजा की तैयारी कर ली थी। करवा चौथ व्रत में लोग अपने घर आए। सोशल मीडिया में करवा चौथ व्रत की आस्था व उत्साह दिखा।
आचार्य दिव्यांशु ने बताया कि करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है। करवा चौथ पर्व के लिए महिलाओं में खासा उत्साह देखा गया। पर्व की तैयारियां महिलाओं ने भोर होते ही शुरू कर दी थीं। महिलाओं ने व्रत रखा और पूरे दिन तैयारियों में लगी रहीं। शाम होते ही सुहागिनें चांद निकलने का इंतजार करने लगीं।
चांद निकला या नहीं यह देखने के लिए सुहागिन महिलाएं व बच्चे बार-बार छतों पर आते-जाते दिखे। जैसे ही चांद दिखाई दिया, सुहागिनें पूजा की थाली लेकर छतों पर पहुंच गईं। विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पति की लंबी आयु की प्रार्थना भगवान से की। इसके बाद पति के दर्शन कर अपना व्रत तोड़ा।
खुरहुरिया निवासी पं. श्रीकांत शुक्ल ने बताया कि करवाचौथ के पर्व पर पार्वती पुत्र गणेश भगवान की पूजा का विशेष महत्व है। इसको लेकर सुहागिनें करवाचौथ का विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का भोग भगवान गणेश को समर्पित करती हैं।
उन्होंने कहा कि करवाचौथ की पूजा में मिट्टी या तांबे के कलश से चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। पुराणों के अनुसार, कलश को सुख-समृद्धि और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलश में सभी ग्रह-नक्षत्रों और तीर्थ का निवास होता है। इतना ही नहीं, यह भी कहा जाता है कि कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सभी नदियों, सागरों, सरोवरों एवं तैंतीस कोटि देवी-देवता भी विराजते हैं।
पूजा की थाली में रोली, चावल, दीपक, फल, फूल, सुहाग का सामान और जल से भरा कलश रखा जाता है। करवा के ऊपर मिट्टी के बड़े दीपक में जौ या गेहूं रखा जाता है। जौ समृद्धि, शांति, उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होता है।