-अब तक अस्थायी राजधानी बुटवल से चल रहा था कामकाज
-राजनीतिक दलों ने कहा, जल्दबाजी में उठाया गया कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नेपाल में लुंबिनी प्रदेश की राजधानी को बुटवल से दांग शिफ्ट किए जाने से वहां के राजनीति गलियारों में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजधानी को स्थानांतरित किए जाने के तरीके का विरोध किया जा रहा है और कहा जा रहा कि बुनियादी ढांचे का निर्माण किए बगैर दांग में राजधानी को ले जाना जल्दबाजी में उठाया गया निर्णय है।
लुंबिनी प्रदेश के गठन के समय उसकी राजधानी दांग में बनाने का निर्णय संविधान में शामिल है। संविधान निर्माण से अब तक अस्थायी व्यवस्था बुटवल से चल रही थी। सरकार विधानसभा व कार्यालय को दांग स्थानांतरित करने में लगी रही, जबकि विधायी समिति ने सुझाव दिया कि बुनियादी ढांचे के निर्माण के बिना राजधानी को शिफ्ट न किया जाए। विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी बयान जारी कर इसके लिए मुख्यमंत्री कुल प्रसाद केसी से अनुरोध किया था। बावजूद इसके रविवार रात बुटवल में मुख्यमंत्री और मंत्रि परिषद के कार्यालय के फर्नीचर और सामान तीन ट्रकों में लाद कर रात के अंधेरे में दांग भेज दिया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक दांग में पहली कैबिनेट बैठक आयोजित करने की तैयारी चल रही है। हालांकि इससे पूर्व नेपाली कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा था और अनुरोध किया था कि स्थायी बुनियादी ढांचे के अभाव में मंत्रालयों को तुरंत स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। सीपीएन-यूएमएल और यूएमएल से प्रांतीय विधानसभा के सदस्य के रूप में चुने गए चार सांसदों लीला गिरी, भूमिश्वर ढकाल, भोज प्रसाद श्रेष्ठ और तुलसी प्रसाद चौधरी ने मंत्रालयों को स्थानांतरित करने के काम को तुरंत रोकने की मांग की है। जिला कपिलवस्तु के लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के सेंट्रल कमेटी के सदस्य केपी शर्मा रविंद्रनाथ मिश्र, राजेश अग्रवाल व जिला खेलकूद अध्यक्ष कपिलवस्तु राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रांतीय कार्यालय को बुटवल से दांग ले जाने से लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। दुर्गम रास्ते और पहाड़ों से होने वाले भू-स्खलन के बढ़ते खतरे, विद्युत की समुचित व्यवस्था न होना, विधानसभा के भवन का न होने जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। इन सारी बातों को नजरंदाज कर दांग स्थित टेक्निकल इंस्टिच्यूट के भवन का अधिग्रहण कर विधानसभा, कार्यालय स्थापित कर दिया गया, जहां विधायकों तक के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है।