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सिद्धार्थनगर: कहीं सिल्ट जमा तो कहीं गैप से सूखी पड़ीं नहरें, बारिश के इंतजार में फसल भी हो रही खराब

Mon, 12 Sep 2022 10:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।

सार

क्षेत्र के सरयू नहर खंड प्रथम से निकला सिसई-रजबाहा व इससे निकली करही, मुडेहरा माइनर जो न केवल सूखी है, बल्कि सिल्ट व गंदगी से पटी भी है। नहर सूखी होने के कारण किसानों के अरमानों पर पानी फिर रहा है। खेतों में सूख रही धान की फसल देख किसान चिंतित हैं।
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सूखी पड़ी इटवा क्षेत्र के ऊंचडीह रजबाहा की माइनर। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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विस्तार
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पर्याप्त बारिश नहीं होने से सूख रही धान की फसल की सिंचाई के लिए किसान जद्दोजहद कर रहे है। बांसी, इटवा, खुनुवां और भनवापुर क्षेत्र की नहरों से निकली माइनर के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचने से किसान परेशान हैं। विभागीय लापरवाही से कहीं सिल्ट जमा होने तो कहीं माइनर में गैप के कारण नहरें सूखी पड़ी हैं। किसान विभाग समेत स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सिंचाई सुविधा दुरुस्त करने की गुहार लगाते दिख रहे हैं।

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भनवापुर प्रतिनिधि के अनुसार, सरयू नहर खंड तीन सोहना शाखा की नौ किमी लंबी बिजवार माइनर से भीटा नानकार, रमवापुर राउत, महुआ खुर्द, सेमरा बनकसिया, सेखुई गोबर्धन, अंदुआ शनिचरा, खुरपहवा, बिजवार बढ़ई, बुढ़िया टायर आदि गांवों के किसान फसल की सिंचाई करते हैं। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण नहर का गैप नहीं भरा गया, जिससे पानी बर्बाद हो रहा है।

क्षेत्र के किसान ज्वाला प्रसाद तिवारी, मयाराम पांडेय, त्यागी पांडेय, लेखराम मिश्र, बलराम, श्रीनेवास पांडेय, कृष्ण देव ने बताया कि रमवापुर राउत, महुआ खुर्द, अंदुआ के पास नहर कटी होने के कारण हम लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। नहर का पानी बर्बाद हो रहा है। इससे फसल सूख रही है। उनका कहना है कि बिजवार माइनर के दोनों तरफ स्थित खेत में पानी पहुंचाने के लिए ह्यूम पाइप डालने की जरूरत है। जेई अरविंद कुमार ने कहा कि गैप को भरवाने के साथ उच्चाधिकारियों से बात कर ह्यूम पाइप लगवाने के लिए प्रयास किया जाएगा।
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रजबाहा में अब तक नहीं आया पानी
ऊंचडीह रजबाहा के आसपास के गांवों के किसान पानी की बाट जोहते रह गए परंतु अब तक पानी नहीं आया है। ऊंचडीह रजबाहा सोहना शाखा के किमी 20 पर बसे गनवरिया गांव से निकलता है। यह गनवरिया, मदारीडिहवा, कठौतिया, साहब पारा, गडावर, हसुडी, पटखौली, मधुकरपुर, सड़वा, पंडरी, रमवापुरसीर, ऊंचडीह, मुड़िला, खुनियांव, गगवल, शनिचरा के सीवान से होते हुए बरगदवा के पास अकरारी नाले में गिरता है। मधुकरपुर निवासी भानू, चौखड़ा निवासी सुनील कुमार और बिशुनपुर सैनी निवासी बाढू बताते हैं कि इन नहरों में केवल भारी बारिश होने पर ही पानी आता है। नहर में अप्रैल से आज तक पानी ही नहीं आया है। भगवतपुर निवासी कमरूज्जमा खां कहते हैं कि कभी इन नहरों में पानी आया है।

 

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साइफन न लगने से परेशानी
 जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में की सिंचाई के लिए प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत जनवरी 1956 में बनी बानगंगा नहर प्रणाली से 147 किमी लंबी 22 नहरें निकली हैं। इसी बैराज से निकली चेतरा माइनर करहिया गांव के टोला फकीर डीह के पास होते हुए महसई सागर में मिलती है। वर्ष 2020-21 में सीमावर्ती क्षेत्र में सरयू नहर परियोजना की कैंपियरगंज शाखा का निर्माण हुआ। सरयू नहर के चेतरा माइनर के क्रॉस करने वाले दो स्थानों पर साइफन लगना था, लेकिन नहीं लगा। इतना ही नहीं, वर्षों से सिल्ट, गाद व झाड़ी से पटी पड़ी चेतरा माइनर की सफाई भी नहीं हुई है। किसान दशरथ चौधरी, राम प्रताप चौधरी, बाल गोविंद पटेल ने बताया कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते साइफन नहीं लगने से खेत की सिंचाई नहीं हो पा रही है।

ग्रामीणों ने खुद लगाया एक साइफन
गुजरौलिया, करहिया गांव के किसानों ने चंदा जुटाकर किलोमीटर चार के पास एक साइफन लगाकर चेतरा माइनर की लगभग दो किलोमीटर खुदाई कराई। तब जाकर कुछ पानी चेतरा माइनर में फकीर डीह तक जाने लगा। इससे कुछ किसानों के खेत की फसल की सिंचाई हो सकी। अठकोनियां निवासी संतराम, बृजलाल पाल, सुरेश, सुग्रीम, बहरैची बाबा का कहना है कि जमगढ़वा नाला के पूरब सरयू नहर सटे चेतरा माइनर से जा रही है, परंतु साइफन नहीं लगाया गया। क्षेत्र के श्याम लाल यादव, डाक्टर पवन कुमार मिश्रा, दिनेश कुमार मिश्रा, रामानंद गिरी, दिनेश कुमार गुप्ता, रविन्द्र कुमार गुप्ता, पटवारी यादव ने चेतरा माइनर में सरयू नहर से पानी छोड़वाने की मांग की है। अधिशासी अभियंता राप्ती नहर खंड प्रथम तुलसीपुर सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि अक्टूबर में किमी दो पर सरयू नहर से चेतरा माइनर को साइफन से जोड़ दिया जाएगा।

सिल्ट से पटी माइनर सूखी पड़ी
क्षेत्र के सरयू नहर खंड प्रथम से निकला सिसई-रजबाहा व इससे निकली करही, मुडेहरा माइनर जो न केवल सूखी है, बल्कि सिल्ट व गंदगी से पटी भी है। नहर सूखी होने के कारण किसानों के अरमानों पर पानी फिर रहा है। खेतों में सूख रही धान की फसल देख किसान चिंतित हैं। जमा पूंजी पंपिंग सेट के डीजल में खर्च हो गई है। इस नहर शाखा से खेसरहा ब्लॉक के मुडेहरा, पंड़री, मसैचा, मसैची, परसौना, पिपरादोयम, सरैनिया, बरैनिया रिउना सहित 50 गांवों के हजारों बीघा खेत की सिंचाई होती थी, परंतु टेल तक पानी नहीं पहुंचने से किसान परेशान हैं। क्षेत्र के सरैनिया निवासी विजय कुमार चौधरी, सतीराम, रामफेर, राकेश, शंभूनाथ, राम नेवास, सुखराम, राम निहाल, अखिलेश ने कहा कि खेत की सिंचाई के लिण् पानी नहीं मिल रहा है। अधिशासी अभियंता उग्रसेन वर्मा ने कहा कि मुख्य शाखा से पूरा पानी खोला गया है, लेकिन बीच में लोग बंधा लगा कर पानी रोक लिए हैं। जेई को निर्देशित किया है। तीन दिन में पानी पहुंच जाएगा।
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