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Siddharthnagar News: फर्जी हॉलमार्क से चमका रहे धंधा, ग्राहकों में खपा रहे अवैध सोना

Thu, 17 Oct 2024 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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फर्जी हॉलमार्क और कच्ची पर्ची के फेर में ग्राहकों को लग रही चपत, राजस्व का भी हो रहा नुकसान
जिले में हर दिन हो रहा है एक करोड़ रुपये से अधिक का धंधा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर।
दिवाली से पहले सोने-चांदी के बाजार में तेजी आ गई है। ऐसे में धंधेबाज भी अपनी दिवाली जगमग करने में जुट गए हैं। जिले के अलग-अलग गहना बाजारों में फर्जी हॉलमार्क के जरिए धंधेबाज अवैध सोना खपा रहे हैं। स्वर्ण व्यापारियों के अनुसार जिले में हर रोज पांच से छह करोड़ रुपये से अधिक के सोने का धंधा हो रहा है, जिसमें अनुमानत: करीब एक करोड़ का अवैध धंधा होता है। इन धंधेबाज के चक्कर में ग्राहकों को चूना लग रहा है।
जिले में हॉलमार्क फैसिलिटी सेंटर नहीं है। इस कारण सोने-चांदी की दुकानों में हाॅलमार्क की जांच करने अधिकारी नहीं पहुंच रहे हैं। इसी का फायदा उठाते हुए कुछ स्वर्ण व्यापारी फर्जी हॉलमार्क का खेल करके कच्चा बिल दे रहे हैं। इसमें बड़े पैमाने पर जीएसटी की चोरी की जा रही है। इसमें ग्राहकों का नुकसान है कि यदि कच्ची पर्ची के आधार पर बिना मेकिंग चार्ज के सोने के गहने की खरीद करने के बाद गुणवत्ता खराब मिली तो वे कहीं भी दावा नहीं कर सकेंगे।
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सूत्रों के अनुसार, सोने के धंधेबाजों ने चोरी से खुद की दुकान पर ही हॉलमार्क मशीन लगाकर एचएम-750 बीआईएस का मार्का लगाकर आभूषण तैयार करना शुरू कर दिया है। अवैध सोने से आभूषण तैयार कर इसे बिना जीएसटी वाले बिलिंग पर्ची (कच्ची पर्ची) से ग्राहकों को बेचा जा रहा है। ये खपत त्योहार के समय और बढ़ जाएगी। दरअसल, धंधेबाज भी जान गए हैं कि ग्राहकों को हॉलमार्क वाले आभूषणों की खरीदारी ही भा रही है। ऐसे में उन्होंने भी इसका रास्ता निकाल लिया है। अब अवैध सोने से बने आभूषणों को खपाने के लिए इस पर फर्जी हॉलमार्क लगवा दे रहे हैं, जबकि बैंक से खरीदे सोने (जीएसटी फर्म पर) से तैयार आभूषणों पर फर्म के नाम से बने बिल (जीएसटी नंबर के साथ) वाली बिलिंग कर रहे हैं। बीआईएस को इसकी जानकारी भी मिली है। इसका फायदा है कि अवैध सोने के आभूषणों को बैंक के भाव वाले दर पर ग्राहकों को बेच देते हैं। ग्राहक भी बैंक के भाव वाले दर से सस्ते के चक्कर में कच्ची पर्ची पर ही आभूषण को खरीद लेते हैं, लेकिन इसमें फायदा धंधेबाजों का ही होता है। नियमानुसार ग्राहकों को पक्के पर्ची वाले बिल (जीएसटी बिल) ही दुकानदार से लेना चाहिए।

खुद से जान सकते हैं खरीदे गए सोने की शुद्धता

बीएसई केयर एप के माध्यम से ग्राहक खुद जान सकते हैं कि गहने नकली तो नहीं। जैसे, ग्राहक किसी दुकानदार के पास गया। अगर दुकानदार बाजार भाव से कम पर आभूषण बेच रहा है तो पहले देखें कि बिलिंग पर्ची कैसी दी है। कच्ची है या पक्की। इसके बाद मोबाइल में बीआईएस केयर एप से ग्राहक हॉलमार्क की जांच खुद कर सकते हैं। शुद्धता जांचने के लिए ज्वेलरी का एचयूआईडी नंबर डालकर एप के वेरिफाई एचयूआईडी को जांचना होगा। बीआईएस की ओर से पंजीकृत दुकानदार होगा तो आईएसआई, हॉलमार्क और सीआरएस पंजीकरण चिह्नों की प्रामाणिकता एप पर दिख जाएगी।


शहर में हॉलमार्क फैसिलिटी सेंटर नहीं है, लेकिन जिन शहरों से गहने आते हैं, वहीं हॉलमार्क करा दी जाती है। ग्राहकों को हॉलमार्क सोना बेचा जा रहा है। ग्राहकों को भी जागरूक होना चाहिए कि वे हॉल मार्किंग वाले गहने ही खरीदें, क्योंकि इसमें उनका भी हित है।
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-अभिषेक अग्रहरि, स्वर्ण व्यापारी

अधिकतर व्यापारी हॉलमार्क वाले गहने ही बेच रहे हैं। कुछ लोग चोरी छिपे फर्जी हॉलमार्क वाले गहने या कच्चे बिल का इस्तेमाल करते हों तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है। यदि कोई कच्चे बिल का काम कर रहा है तो इसकी शिकायत स्वर्ण व्यापारी संघ से भी की जा सकती है।
- मिट्टठू लाल कसौधन, अध्यक्ष, स्वर्ण व्यापारी संघ
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