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Siddharthnagar News: अच्छा नहीं हुआ कारोबार, अब नहीं आएंगे इस बाजार

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राजस्थानी थाली के स्टॉल पर काम करते दुकानदार किशन व अन्य। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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अच्छा नहीं हुआ कारोबार, अब नहीं आएंगे इस बाजार
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- सिद्धार्थनगर महोत्सव में पिछली बार की अपेक्षा कम पहुंचे लोग
- राजस्थान और लखनऊ से आकर स्टॉल लगाने वाले हुए मायूस
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बीएसए मैदान में आयोजित पांच दिवसीय सिद्धार्थनगर महोत्सव में दुकान लगाने वाले व्यापारी मायूस हैं।
व्यापारियों के अनुसार मेला में पिछले सालों की अपेक्षा भीड़ कम पहुंची। उनका कारोबार अच्छा नहीं हुआ है। अंतिम दिन की रात में ही वे अपने स्टॉल समेटने लगें। कई व्यापारियों का कहना है कि अब इस महोत्सव में आने से पहले विचार करेंगे।
फूड जोन सहित अन्य स्टॉल भी हटने शुरू हो गए हैं, जबकि महोत्सव समाप्त होने के बावजूद भी मेला लगा हुआ है। राजस्थान और लखनऊ से आए दुकानदारों का कहना है कि चार दिन तक उनकी बिक्त्रस्ी अपेक्षा के अनुसार नहीं हुई। महोत्सव के दौरान फायदा नहीं हुआ तो बाद में कुछ बेहतर होने की संभावना नहीं है।
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बेहतर प्रबंधन के अभाव में हुई दिक्कत
कामर्शियल जोन में कपड़े की दुकान लगाने वाले सुल्तानपुर के अबरार अहमद ने कहा कि जैसा सुना था, वैसी बिक्त्रस्ी नहीं हुई। स्टॉल लगाने में 20 हजार रुपये खर्च हुए, पांच दिन बर्बाद करने के बावजूद भी कोई फायदा नहीं हुआ। मेला में असुविधाओं से परेशान होना पड़ा।
सुल्तानपुर के नौसाद अली ने कहा कि मेला परिसर में स्वचालित शौचालय कम थी। उसमें पानी की भी कमी रही। पीने के पानी की अच्छी व्यवस्था नहीं थी, जबकि अन्य महोत्सव की तरह स्टॉल में लंच पैकेट और पानी की सुविधा दी जानी चाहिए। सुविधा के बदले शुल्क भी लिया जाए तो कोई दिक्कत नहीं होगी।
चूरन और माउथ फ्रेशनर की दुकान लगाने वाले बिहार के धीरज कुमार ने भी मेला के प्रबंधन पर सवाल उठाएं। उन्होंने कहा कि सात हजार रुपये नुकसान हो गया। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
मेला में पांच बोरी भुट्टा ही बिका, जबकि इतना भी भुट्टा वापस ले जाना पड़ रहा है। यह महाराष्ट्र से आता है, जिसे उबालकर बेचा जाता है। घाटा नहीं लगा, लेकिन फायदा भी नहीं हुआ। फायदा होने की उम्मीद नहीं है इसलिए स्टॉल हटा लिया।
- विपिन पटेल, अमेरिकन भुट्टा
बचत कुछ नहीं हुआ, बल्कि हिसाब जोड़ने पर नुकसान हो रहा है। फूड जोन के बाहर खाने-पीने की दुकानें लग जाने से ग्राहक कम आए। इस तरीके से मेला लगा तो फिर नहीं आएंगे। अब आना हुआ तो पहले बात करूंगा।
- आशीष दुबे, लखनऊ की कुल्फी
मेला में चार दिन तक बिक्त्रस्ी कम हुई। स्टॉल में 12 लोग काम कर रहे थे, चार दिन ग्राहकों की कमी रही। फूड जोन का एक ही गेट होना चाहिए, कई गेट होने के कारण भी इस बार नुकसान हुआ।
- किशन, स्पेशल राजस्थानी थाली
पिछले साल की अपेक्षा इस बार भीड़ कम आई। हम लोग देश भर में जाकर स्टॉल लगाते हैं। कई साल से इस महोत्सव आ रहे हैं, लेकिन पहली बार यहां समस्या हुई है। अन्य दुकानदार भी निराश हैं।
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- हरिकेश, राजस्थानी थाली
15 प्रतिशत रहा लोड फैक्टर
परिवहन निगम ने डुमरियागंज, ककरहवा व बढ़नी से महोत्सव के लिए तीन बसों को चलाया। एआरएम जगदीश प्रसाद के अनुसार लोड फैक्टर करीब 15 प्रतिशत रहा। सवारी नहीं होने से कई बार बस आगे नहीं भेजी गई।
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