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Siddharthnagar News: विभाग का वरदान, सिस्टम में पनप रहे मरीज माफिया

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- मेडिकल कॉलेज से गर्भवती को निजी अस्पताल पर भेजने वाली आशा वर्कर पर तीन माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
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- अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पताल में गलत ऑपरेशन से चली गई थी प्रसूता और बच्चे की जान

- मेडिकल कॉलेज से एक आशा वर्कर द्वारा भेजने की बात आई थी सामने

- तत्कालीन सीएमओ ने जांच कर कार्रवाई की कही थी बात, न चिह्नित हुई आशा वर्कर न अब तक हुई कार्रवाई



संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। मरीज माफिया केवल बाहरी ही नहीं है, बल्कि सिस्टम में बैठे स्वास्थ्य महकमें के कुछ लोग भी हैं, लेकिन विभाग की गठजोड़ और दामन का दाग उजागर न हो। इसलिए नाम सामने आने के बाद भी विभाग पर्दा डालने का कार्य करता है। जैसा कि नगर में अवैध रूप से संचालित होने वाले लाइफ अस्पताल में आशा वर्कर का नाम सामने आने के तीन माह बाद विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि मेडिकल कॉलेज से रेफर होने के बाद एक आशा वर्कर और एक युवक लेकर गया था। उसका नाम भी पीड़ित ने बताया था। कार्रवाई की बात तो दूर, अभी तक उसकी पहचान तक नहीं हुई। जबकि तत्कालीन सीएमओ ने जांच करके कार्रवाई करने का दम भरा था।
मामला विभाग से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई ठंड बस्ते में चली गई। ऐसा लोगों का कहना है। 31 अक्टूबर को नगर में विकास भवन के ठीक सामने 200 मीटर दूरी पर अवैध रूप से संचालित हो रहे लाइफ हास्पिटल का एक मामला सामने था। यहां एक प्रसूता और नवजात की जान चली गई। मेडिकल कॉलेज से निजी अस्पताल तक पहुंचाने में एक आशा जिसका नाम मीरा देवी और एक संतोष नामक युवक का नाम सामने आया था। परिजनों की तहरीर पर अस्पताल संचालिका और अज्ञात चिकित्सक पर केस दर्ज किया गया। पुलिस विवेचना चलने की बात कर रही है, जबकि स्वास्थ्य विभाग के सिस्टम का हिस्सा कहे जाने वाली मीरा कौन है। वाकई में आशा वर्कर थी या नहीं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, जबकि तत्कालीन सीएमओ ने आशा के बारे में जांच करके कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन मामला सिस्टम से जुड़ा होने के कारण ठंडे बस्ते में पड़ गया। अगर चेहरा उजागर होता और कार्रवाई होती तो मरीज के सौदागरों में डर होता।
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यह थी घटना

जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कपिया मिश्र गांव निवासी परशुराम की बहू कुसुम (22) पत्नी सुग्रीव का डिलीवरी होनी थी। उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ ने लेकर गए। जहां से जिला अस्पताल में डिलीवरी के लिए भेजा गया। जिला अस्पताल के चिकित्सक ने स्थिति गंभीर देखकर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां जाने के लिए रुपये का इंतजाम कर रहा था कि तभी आशा मीरा देवी व संतोष नाम का युवक मुझे बिना बताए परसा शाह आलम में संचालित लाइफ हास्पिटल ले गए। हमें बिना बताए ही 27 अक्टूबर को ऑपरेशन कर दिया और बच्चे की मौत हो गई। जब देखा गया तो बच्चे का शरीर काला पड़ गया था। इसमें इनकी घोर लापरवाही थी। दवा और ऑपरेशन के नाम पर 63 हजार रुपये की वसूली की गई। उल्टी सीधी दवा देने के कारण प्रसूता की मानसिक स्थिति भी बिगड़ गई और वह गंभीर बीमार हो गई। छापामारी में उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। वहां कुछ ही घंटे चले इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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बोले जिम्मेदार

मामले की जांच कराई जाएगी कि कार्रवाई कहां तक पहुंची है। केस दर्ज करके पुलिस अपने स्तर से मामले की जांचकर रही है। रही बात जिस आशा का नाम आया है, उसके बारे में कहां तक जांच पहुंची है यह देखा जाएगा। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

डॉॅ. डीके चौधरी, प्रभारी सीएमओ
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