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बोर्ड परीक्षा : डीजे के शोर में तैयारी पड़ रही कमजोर

Fri, 16 Feb 2024 12:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। ध्वनि प्रदूषण पर शासन प्रशासन के नियंत्रण के दावे की डीजे संचालक हवा निकाल रहे हैं। शहर में 120-200 डेसिबल आवाज में बज रहे डीजे के शोर से लोगों का कान कमजोर हो रहे हैं। डीजे को कम आवाज में रात के 10 बजे तक ही बजाने का नियम है। लेकिन 12 से रात दो बजे तक डीजे बज रहे हैं। इससे बोर्ड परीक्षा, पुलिस भर्ती, सीबीएसई सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी की तेज आवाज से पढ़ाई कमजोर पड़ रही है। वहीं, उनका ध्यान भी भटक रहा है। इससे वह परेशान हैं।
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नियम कायदे की बात करने वाले अफसर शहर में दिल और दिमाग की नसों को हिला देने वाले शोर से अनजान हैं। चिकित्सक इससे कान की आवाज चले जाने और हार्ट के रोगियों केे लिए जान का खतरा बता रहे हैं। वहीं, अभिभावक दबी जुबान से आवाज उठाते हैं। लेकिन शिकायत करने के लिए आगे नहीं बढ़ रहे हैं। पुलिस प्रशासन को शिकायत का इंतजार रहता है। उनके कानों में यह शोर पहुंच ही नहीं रहा है। ऐसे में इस शोर से कैसे निजात मिले यह बड़ा सवाल है।

शहर में 14 लॉन और मैरिज हाल

15 जनवरी से 11 मार्च के बीच शादी के कुल 19 लग्न हैं। शहर में शादी के लिए 14 लॉन और मैरिज हाल हैं। यहां तकरीबन 250 शादियां होनी हैं। हर लॉन और मैरिज हाल घनी आबादी के बीच में हैं। जहां बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं। 250 शादी अगर लॉन और मैरिज हाल में है तो वहीं 100 से अधिक शादी लोग अपने घरों से कर रहे हैं। यहां रात के नौ से 10 बजे तक द्वार पूजा की शुरुआत होती है जो रात के 12 से एक बजे तक बजता है। बजने की स्थिति यह है कि अचानक आवाज कान में गूंजे तो शायद आवाज हमेशा के लिए चली जाए। पर नियंत्रण करने वाला कोई नहीं है। पूरी लग्न बोर्ड परीक्षा के बीच ही है। ऐसे में बच्चों के समक्ष तैयारी को लेकर बड़ी समस्या है।
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बोले विधि के जानकार : परिसर में घुसकर लाउडस्पीकर जब्त कर सकती है पुलिस

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार कानून में ध्वनि की सीमा उल्लंघन पर धारा 15 में सजा का प्राविधान है। लेकिन ये प्रभावी ढंग से लागू नहीं होती। उल्लंघन पर पांच साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माने की सजा हो सकती है। लगातार उल्लंघन पर 5.000 रुपये रोज जुर्माना का प्राविधान है। ध्वनि प्रदूषण पर पुलिस परिसर में घुसकर लाउडस्पीकर जब्त कर सकती है। 45 डेसीबल तक साउंड रात 10 बजे तक बजा सकते हैं। इससे अधिक आवाज में बजाना अपराध की श्रेणी में आता है।

-संजय कुमार श्रीवास्तव, अधिवक्ता अपराध, जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर

बोले विशेषज्ञ

0 से 25 डेसिबल सामान्य श्रेणी है, इतनी आवाज में सुनने में कोई दिक्कत नहीं होती है। 26 से 40 तक हर व्यक्ति सुन रहा है, जिसमें किसी किसी के कान में दिक्कत हो सकती है। 41 से 55 तक है तो लंबे समय तक सुनना घातक हो सकता है। 56 से 70 तक आवाज एक से दो घंटे तक ही सुन सकते हैं। 70 से 90 डेसिबल तक पहुंचा तो वह घातक श्रेणी हैं। जो कान में दर्द, दिमाग में हलचल, और सीने में दर्द शुरू हो जाता है। डीजे की आवाज हमेशा 120 डिसेबल से 250 तक बज रहा है। जो एकाएक कान में गूंजे तो परदा फट जाएगा और सुनने की क्षमता चली जाएगी। हार्ट के रोगियों की जान भी जा सकती है। अगर डीजे बजे तो उससे दूर रहने प्रयास करें। एकाएक सुनना बंद हो जाए तो तत्काल चिकित्सक को दिखाएं।

-डॉ. संजय कुमार शर्मा, नाक कान, गला रोग विशेषज्ञ

जिले में इस बोर्ड के हैं इतने परीक्षार्थी

यूपी बोर्ड, सीबीईएसई, आईसीएसई, पुलिस भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं चल रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक यूपी बोर्ड 63320 परीक्षार्थी, सीबीईएसई में लगभग 10 हजार, आईसीएसई बोर्ड में दो हजार और पुलिस भर्ती के 12 हजार परीक्षार्थी होंगे। वहीं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को जोड़ा जाए तो मार्च तक जिले में एक लाख से अधिक बच्चे परीक्षा में बैठ रहे हैं।

ध्वनि प्रदूषण करना अपराध है। समय-समय पर जांच किया जाता है। जांच कराई जाएगी। अगर तेज आवाज में और तय समय के बाद कोई बजाता हुआ मिलेगा तो कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. ललित कुमार मिश्र, एसडीएम सदर
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