सिद्धार्थनगर। कालानमक धान के नकली बीज बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। कृषि विभाग ने कालानमक धान की तीन (कालानमक पूसा नरेंद्र एक, कालानमक केएन-3, कालानमक किरन) प्रजातियों को सही बताया है, लेकिन दूसरे क्षेत्र के सुगंधित धान को कालानमक के नाम पर बेचा जा रहा है। ऐसी स्थिति में कृषि वैज्ञानिक और जागरूक किसान चिंतित हैं। यदि कालानमक की गुणवत्ता कम हुई तो देश-विदेश में इसके चावल की बिक्री पर असर पड़ेगा। नकली बीज के कारण चावल की सुगंध और जायका खराब हो सकता है।
बता दें कि कालानमक धान की नर्सरी 20 जून के बाद डाली जाएगी। जुलाई के अंत तक इसकी रोपाई की जाएगी। कालानमक धान की खेती करने वाले किसानों ने बीज खरीदना शुरू कर दिया है। इसी का फायदा कुछ लोग उठा रहे हैं।
सिद्धार्थनगर, महराजगंज, देवरिया, संतकबीरनगर, कुशीनगर, गोरखपुर, बस्ती, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच में कालानमक धान के लिए अच्छी जलवायु है। जियोग्राफिकल इंडीकेशन के अनुसार इन 11 जिलों में पैदा हुए कालानमक धान में सुगंध के साथ पर्याप्त पोषक तत्व होते हैं। इनके अलावा अन्य क्षेत्रों के सुगंधित धान में पोषक तत्वों का असंतुलन पाया जाता है। कालानमक धान का बीज यदि इन क्षेत्रों में पैदा हुआ है तो उसे सही माना जाएगा। लेकिन बाजार में कर्नाटक, नैनीताल के सुगंधित धान को कालानमक के नाम पर बेचा जा रहा है। जोकि सही नहीं है। कालानमक का छिलका काला होता है, जबकि सफेद धान के बीज को भी कालानमक के नाम पर बेचा जा रहा है।
बांसी के किसान प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र से उन्हें कालानमक धान का बीज मिला था। वे किसानों को 100 रुपये किलो की दर से बेच रहे हैं, जबकि दुकानों पर दूसरे जिलों में पैदा हुए धान को 240 से 350 रुपये किलो तक बेचा जा रहा है, इससे मूल कालानमक की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
बांसी क्षेत्र के किसान राजकुमार द्विवेदी बताते हैं कि किसानों को शुद्ध बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सोहना ने किसानों से बीज तैयार कराया है। कृषि विभाग ने कालानमक की तीन प्रजातियों कालानमक पूसा नरेंद्र एक, कालानमक केएन-3, कालानमक किरन को बिक्री करने का आदेश जारी किया है।