भनवापुर। ब्लाॅक क्षेत्र के चौखड़ा में चल रही श्रीराम कथा में मंगलवार रात कथा वाचक बलराम दास ने भरत जी के चरित्र का वर्णन किया। कहा कि समाज के लिए भरत चरित्र अनुकरणीय है, जो भाई के प्रति प्रेम का अनोखा उदाहरण है।
कथा व्यास ने कहा कि रामजी के वन गमन के बाद दशरथ के मरणोपरांत सूचना पर ननिहाल से अयोध्या पहुंचे भरतजी को श्रीराम को वन जाने की जानकारी मिली। जिसके बाद वह माता कैकेई व दासी मंथरा से काफी नाराज हुए। भरत के राज सिंहासन त्यागने की सूचना पर पूरे अयोध्यावासी उनका जयकारा लगाने लगे। इस दौरान रामू गुप्ता, मंगेश सोनी, राकेश गौड़, अमित गुप्ता, आकाश चौधरी, विकास आदि उपस्थित रहे।