सिद्धार्थनगर। पासपोर्ट के लिए आवेदन किया?? अगर हां.. तो किसी अनजान कॉल से सावधान रहें। क्योंकि साइबर ठग जल्द पासपोर्ट जारी करा देने के नाम पर लोगों को चूना लगा दे रहे हैं। 15 दिन के भीतर ठगी के ऐसे दो मामले सामने आ चुके हैं। ठग पासपोर्ट जारी कराने के लिए पांच से आठ हजार रुपए मांगते हैं। रकम बहुत बड़ी नहीं होने और पासपोर्ट जल्द मिल जाने की उम्मीद में लोग यह रकम दे भी देते हैं और ठगी के शिकार हो जा रहे हैं।
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आवेदन के नाम पर भेजा लिंक, क्लिक करते ही खाते से कट गए रुपएशोहरतगढ़ क्षेत्र के कोमरी निवासी ओमप्रकाश पेशे से ड्राइवर हैं। उन्हें विदेश में ड्राइविंग का ऑफर मिला था। उनके पास पासपोर्ट नहीं था। उसे बनवाने के बारे में पता करने के दौरान इंटरनेट पर एक नंबर दिखा। जिस पर कॉल करने पर उधर से आवेदन के लिए आधार और निवास प्रमाणपत्र मांगा गया। इसके बाद आवेदन की बात करते हुए दो बार मैसेज भेजा। उस पर क्लिक करने के बाद मोबाइल बंद हो गया। जब खुला तो दो बार में पांच हजार रुपये खाते से कट चुके थे। तब उन्हें ठगे जाने का पता चला और पुलिस में शिकायत की।
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कॉल करके बोला- आधार संख्या बताओ, फिर की ठगी
जोगिया क्षेत्र के निवासी अल्ताफ को दुबई जाना था। उन्होंने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। दो दिन बाद उनके पास एक कॉल आयी। काॅल करनेवाले ने पासपोर्ट जल्द बनवा देने के नाम आधार कार्ड को मैसेंजर पर भेजने को कहा। अल्ताफ ने विश्वास में आकर भेज दिया। उसके बाद एक मैसेज आया और फिर कॉल करके ओटीपी नंबर मांगा। जैसे ही अल्ताफ ने ओटीपी बताया, उसके खाते से दो बार में छह हजार रुपये कट गये।
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आठ हजार रुपये वापस कराया
नगर के निवासी अब्दुल करीम से एक व्यक्ति मिला और ऑनलाइन पासपोर्ट बनवा देने की बात करते हुए एक नंबर दिया। उस व्यक्ति ने एक दूसरे व्यक्ति का नंबर दिया। जब उससे बात हुई तो उसने प्रक्रिया समझाया और इसी बीच आठ हजार रुपये ऑनलाइन माध्यम से खाते से मार दिया। शिकायत के बाद जांच हुई।साइबर सेल की मदद से आठ हजार रुपये दो दिन पहले उसके बैंक खाते में वापस हो गया। फिर उसने कहा कि रुपये मिल गया है, हम केस दर्ज नहीं करवाएंगे।
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पासपोर्ट बनवाने का नियम
पासपोर्ट के लिए पहले ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद पासपोर्ट कार्यालय से मैसेज आता है, जहां पर निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा किया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट लगकर थाने और फिर लोकल जांच एजेंसी के पास जाता है। थाने पर आपराधिक हिस्ट्री देखने के बाद रिपोर्ट लगा दी जाती है। इस प्रकार लोकल जांच एजेंसी जांच करके रिपोर्ट लगाती है। अगर सबकुछ सही है तो अधिकतम 21 दिन के भीतर पासपोर्ट ऑनलाइन माध्यम से हाथ में पहुंच जाता है। कभी- कभी दिए गए पहचान पत्र में भिन्नता पर ही थाने पर बुलाया जाता है, नहीं तो कहीं जाने की जरूरत नहीं है।
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बोले साइबर एक्सपर्ट
साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है। इंटरनेट पर कई फेक वेबसाइट और कस्टमर केयर नंबर हैं। उसपर क्लिक या कॉल करने पर ठग अपने झांसे में ले लेते हैं। इसके बाद ठगी का शिकार बना देते हैं। इसलिए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। कॉल पर निजी जानकारी न शेयर करें। न समझ में आने पर संबंधित विभाग के कार्यालय में जाकर पूरी जानकारी हासिल करें। अगर ठगी के शिकार होते हैं तो तत्काल शिकायत दर्ज कराएं, जितनी जल्द शिकायत दर्ज कराएंगे। धन वापसी की संभावना उतनी ही अधिक रहती है।
-अरुण कुमार प्रभारी निरीक्षक साइबर सेल
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बोले जिम्मेदार
साइबर अपराध के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विद्यालय और अन्य स्थानों पर पुलिस लोगों को साइबर अपराध क्या है और क्या सावधानी बरते, इसके बारे में जागरूक कर रही है। साथ ही ठगी के जिन मामलों में शिकायत दर्ज कराई जाती है। जांच करके कार्रवाई करने के साथ ही धन की वापसी भी करवा रही है।