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Siddharthnagar News: छोटे बच्चे हैं तो हो जाएं सावधान, कुत्ते हुए हमलावर

Fri, 09 Feb 2024 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। अगर आपके घर छोटे बच्चे हैं और अकेले घूमने निकल जाते हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि जिले में 25 हजार से अधिक घुमंतू कुत्ते शहर से गांव तक की गालियों में घूम रहे हैं, जब मन किया किसी को भी नोच ले रहे हैं।
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इटवा थाना क्षेत्र के बरगदवा गांव में बकरी के लिए घास लेने गई 10 साल की बच्ची को कुत्तों के झुंड ने नोचकर मार डाला। हमलावर हो चुके कुत्तों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन के पास कोई नियम और कानून नहीं है। ऐसे में बच्चों और खुद को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी स्वयं उठाएं। अगर ऐसा नहीं किए तो आपके साथ भी अनहोनी हो सकती है, ऐसे इन्कार नहीं किया जा सकता है।

महानगरों में घुमंतू कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नगर निगम की ओर से अभियान चलाकर उन्हें पकड़ा जाता है। समय-समय पर बधिया करण भी किया जा सकता है। जिससे इनकी तादाद बढ़ने न पाए। लेकिन जिले में घुमंतू कुत्तों को पकड़ने और उन्हें नियंत्रित करने की नगर पालिका और नगर पंचायत में कोई व्यवस्था नहीं है। जिसका नतीजा है कि घुमंतू कुत्तों की संख्या में दिन-ब-दिन वृद्धि हो रही है। आए दिन वह किसी न किसी को नोच रहे हैं।
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इटवा थाना क्षेत्र बरगदवा पश्चिम गांव मेें बकरी के लिए घास लेने के लिए गई आबिद की 10 वर्षीय पुत्री तरन्नुम को कुत्तों के झुंड ने नोच कर मार डाला। यह घटना किसी के साथ हो सकती है। ऐसे में अगर छोटे बच्चे हैं तो घर बाहर निकलने पर उनका ख्याल रखें। क्योंकि कुत्ते हमलावर हो गए हैं। इनके हमलावार होने के पीछे ठंड मौसम और खाने की कमी प्रमुख वजह बता रहे हैं।

चार साल पहले हुई गणना, थे 19900 कुत्तेे
एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 में हुए 19वीं पशु गणना में जिले में 19900 घुमंतू कुत्ते पाए गए थे। पशु चिकित्सा विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक इधर चार साल में लगभग पांच हजार संख्या बढ़ी होगी। क्योंकि एक कुत्ते की उम्र सीमा 14 वर्ष है। मृत्युदर कम है, लेकिन प्रजनन दर अधिक है। इसलिए हर साल संख्या बढ़ रही है।

एक हजार होंगे पालतू कुत्ते

शहर की बात करें तो यहां 257 पालतू कुत्ते पंजीकृत हैं। जिन्हें विभाग की ओर से नियमित टीकाकरण किया जाता है। इसके साथ ही बीमार होने पर उनका उपचार किया जाता है। इस हिसाब से पूरे जनपद में पालतू कुत्तों की संख्या लगभग एक हजार है। ऐसा पशु चिकित्सा विभाग के जिम्मेदार मानते हैं।

वृद्ध को दौड़कर काटा

एक माह पहले शहर के ही पुरानी नौगढ़ के पास जा रहे वृद्ध अल्ताफ पर कुत्तों का झुंड टूट पड़ा। जबतक राहगीर उसे बचाते कई जगह काट लिए। लोग उसे जिला अस्पताल पहुंचाए, जहां उसका इलाज हुआ। वृद्ध नेपाल बॉर्डर के अलीगढ़वा क्षेत्र का निवासी था। वह किसी रिश्तेदारी में आया था।

कुत्ते ने आठ लोगों को काटा, मारना पड़ा
चिल्हिया थाना क्षेत्र के उदयराजगंज के पास कोई जर्मन सेफर्ड कुत्ते को लाकर छोड़ गया था। कुत्ता पागल हो चुका था और एक दिन में आठ लोगों को काट लिया। इसके बाद कुछ लोगों ने मिलकर उसे मार डाला। अगर मारते नहीं तो न जाने कितने लोगों को काटता।

महिला को कुत्ते ने नोचा

इटवा थाने के ग्राम परसिया में इन्हीं घुमंतू कुत्तों के झुंड ने एक महिला पर हमला कर दिया। जिसमें परसिया निवासी मुन्नी देवी (50) घायल हो गई। बकौल मुन्नी देवी पर पीछे से आये कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। जिसमें मेरे पैर व पीठ में काटने के कारण चोटें आईं। महिला को सीएचसी इटवा लाया गया। जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद घर जाने दिया।

सात हजार लोगों को लगता है एंटी रेबीज का इंजेक्शन

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के एंटी रेबीज कक्ष से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक एक साल में छह से सात हजार लोगों को एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगता है। इसमें कुत्ता, सियार, बिल्ली, बंदर आदि शामिल हैं। 70 प्रतिशत कुत्तों के काटने के मामले रहते हैं। इसी प्रकार इतनी ही संख्या में सीएचसी पर इंजेक्शन लगता है।

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ठंड के मौसम में कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। उन्हें न तो खाने को कुछ मिलता है और न ही कहीं बैठने का ठौर रहता है। ऐसे में वह भागते रहते हैं। कई बार लोग मारते हैं, पैर गाड़ी चढ़ा देते हैं। ऐसे में वह चिड़चिड़ हो जाते हैं। इसी की वजह से वह हमलावर हो गए हैं। इनसे खुद और बच्चों को दूर रखें।

-डॉ. अरुण कुमार प्रजापति, पशुधन प्रसार अधिकारी

कुत्ता, बंदर, बिल्ली, सियार कोई भी पशु काटता है तो एंटी रेबीज का इंजेक्शन जरूर लगवाएं। इसमें कुत्ते के अंदर जो किटाणु होते हैं वह बहुत ही खतरनाक होते हैं। जो काटने के बाद लार के साथ व्यक्ति के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। इनका असर कई साल बाद तक होता है। एक बार असर हो गया तो इंसान को बचाया नहीं जा सकता है। इसलिए अगर यह जानवर काट रहे हैं तो तत्काल किटाणु का इंजेक्शन लगवाएं जो पूरी तरफ से मुफ्त है और सरकारी अस्पताल में उपलब्ध है।
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-डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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