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Siddharthnagar News: रहिए सावधान... होली में मिलावटी कहीं कर न दे सेहत खराब

Fri, 22 Mar 2024 02:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। त्योहार आते ही मिलावट का धंधा तेज हो जाता है। मांग पूरी करने के लिए स्टाॅक करने का कार्य दुकानदार शुरू कर देते हैं। जैसा की होली को देखते हुए बाजार में स्टाक करने का कार्य शुरू हो गया है। हर सामान में मिलावटी हो रही है। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में एक साल में 91 सामान में मिलावट की पुष्टि हुई है। कार्रवाई के आंकड़े यह तस्दीक कर रहे हैं कि जिले में सामानों में मिलावट की जाती है। दूध से लेकर खोवा और मिठाई और नमकीन में अधिक खेल होता है।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने खाद्य पदार्थों की जांच के लिए लगातार छापा मारना शुरू कर दिया है। लेकिन सैंपलिंग के बाद रिपोर्ट आने में एक माह से 45 दिन का वक्त लगेगा। ऐसे में आप बीमारी की चपेट में आ चुके होंगे। इसलिए आप अपने सेहत को लेकर खुद सतर्क हो जाइए। ऐसा चिकित्सक सलाह दे रहे हैं।

दूध उत्पादन का केंद्र नहीं फिर भी प्रर्याप्त मात्रा में उपलब्ध

जिले में दुग्ध उत्पादन का कोई बड़ा स्रोत नहीं है। जो लोग पशु पालन किए हैं, उनके स्वयं के उपयोग में दूध आ जाता है। लेकिन खोवा और दूध भारी मात्रा में उपलब्ध है। जानकार बताते हैं कि जिले में दुकानदार कानपुर, गोरखपुर और बलरामपुर से खोवा मांगते हैं। कानपुर के खोवा में बड़े पैमाने पर मिलावटी की जाती है। पूर्व में रोडवेज की बसों में बांसी और अन्य स्थानों पर खोवा पकड़ा जा चुका है। लेकिन किसका खोवा था और कौन भेजा था, इसके बारे में जांच आगे नहीं बढ़ी।
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यह है नियम पर नहीं होता है पालन

खोवा और उससे बनने वाली मिठाई, इसके अलावा दुकान पर नियमित बनाने वाली मिठाई लोगों को सही मिले। इसके लिए जनवरी 2021 में शासन की ओर से नियम लागू किया गया था। इसमें बताया गया है कि दुकान पर बनने वाली मिठाई कब बनी और कबतक बिक्री योग्य है। यह सभी दुकानदारों को मिठाई के आगे नोटिस चस्पा करने के निर्देश थे। लेकिन यह आदेश केवल कागजों में सीमित रह गया है। दुकानों की पड़ताल की गई तो कई लोगों ने आदेश से अनभिज्ञता जाहिर की। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी नियम के बारे में जानकारी नहीं।

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इतने समय तक रख सकते हैं यह मिठाई

खाद्य सुरक्षा विभाग के जानकारों के मुताबिक दूध से बनने वाली मिठाई गर्मी में 24 घंटे तक खाने योग्य रहता है। अगर ठंड मौसम है तो 36 घंटे तक सेवन कर सकते हैं। वहीं खोवा से बनने वाली मिठाई एक सप्ताह तक रख सकते हैं। उससे अधिक समय होने पर खाने पर बीमार हो सकते हैं। जबकि दुकानों पर कई दिन का छेना, खोवा से बनी मिठाई और पनीर को स्टाॅक किया जा रहा है।

मिलावट की इस तरह से करें पहचान


खोवा
- खोवा में मिलावट की अधिक संभावना रहती है। इसकी पहचान के लिए खरीदते समय ग्राहक थोड़ा सा हाथ में ले लें। उसके बाद उसका गोली तैयार करें। अगर गोली बनाते समय हाथ चिकना हो रहा है तो समझिए की सही है। अगर गोली बनाने पर खुरदुरा है तो मिलावटी है।

मिठाई
- अगर सिल्वर पॉलिस लगी मिठाई खरीदते हैं तो इसमें भी गड़बड़ी होने की बड़ी संभावना है। इसकी पहचान के लिए मिठाई पर लगे पॉलिस को हाथ में लेकर मलिए, अगर सही है तो हाथ में विलीन हो जाएगा। अगर गड़बड़ है एलुमिनियम वाला पॉलिस है तो खुरदुरा हो जाएगा। जो सेहत के लिए नुकसानदेह है।

डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ
- अगर डब्बा बंद खाद्य पदार्थ, जैसे मिठाई, तेल, नमकीन व अन्य पदार्थ तो लें तो। पैक पर कहां की कंपनी, उत्पादन और उसके खराब होने की तिथि, इसमें क्या-क्या मिला है, उसकी मात्रा कितनी है। यह जरूर देखें। अगर पैक पर यह जानकारी नहीं है तो न खरीदें, इसमें मिलावट हो सकती है।

कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट

खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 11 माह में 1066 जगहों का टीम ने निरीक्षण किया है। इसके अलावा 151 जगह छापामारा। इसमें 184 नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया था। इसमें 72 नमूने में मिलावटी की पुष्टि हुई। जबकि 19 असुरक्षित मिले। जिसमें पैक पर नियम के बारे में जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा 21 मामले में पैक वाले सामान में गलत जानकारी देना पाया गया। इसमें मिलावटी के मामले में दुकानदारों पर 22.39 लाख रुपये एडीएम कोर्ट की ओर से जुर्माना लगाया है। मिलावट पाए जाने वाले अधिकांश नमूना दूध, मिठाई और नमकीन का है।

बाजार में बढ़ी रौनक, खरीदारी में जुटे लोग

होली 25 मार्च को है, लेकिन बाजार में खरीदारी अभी से शुरू गई है। मिठाई कम, लेकिन किराना की दुकान पर लोग पहुंच रहे हैं, छोटी बड़ी सभी दुकानों पर बाजार में लोग दिख रहे हैं। इसमें तेल, रिफाइन, मैदा और सूखे फल की लोग खरीद करने लगे हैं। क्योंकि गोझिया में विशेष रूप से सूखे फल का प्रयोग होता है। होली का रंग फीका न पड़ जाए, इसलिए अभी से तैयारी में जुट गए हैं।

मिलावटी से किडनी खराब होने तक का खतरा

मिठाई बनाने के लिए खोवा, घी, तेल, दूध, आर्टिफिशियल फ्लेवर और कलर का इस्तेमाल किया जाता है। मिठाई में इन सभी चीजों की क्वांटिटी बढ़ाने के लिए इनमें आर्टिफिशियल चीजें जैसे चॉक, यूरिया, साबुन और व्हाइटनर को मिलाया जाता है जो सेहत को कई तरह के नुकसान पहुंचाते हैं। मिठाई को सजाने तक में वर्क की जगह एल्युमिनियम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो सेहत के लिए घातक है। दूषित मावा या अन्य सामग्री से बनी मिठाइयों का सेवन करने से ब्रेन कैंसर, माउथ कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, ल्यूकेमिया, श्वास संबंधी बीमारियों और किडनी के रोगों का खतरा अधिक रहता है। मिलावटी मिठाई में स्टार्च, अनसैचुरेटेड फैट और कुछ खतरनाक चीजें मिलाई जाती हैं। जिससे कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है। इस मिठाई से दिल के रोगों और स्ट्रॉक का खतरा अधिक रहता है। मिठाई के उपर एल्युमिनियम का वर्क ब्रेन और बोन की समस्या पैदा कर सकता है। ऐसी मिठाई बच्चों में किडनी को नुकसान पहुंच सकती है।

-डॉ. एसके राव, विशेषज्ञ मेडिसिन विभाग

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम लगातार जांच करती है। समय-समय पर छापामार अभियान चलाया जाता है। कार्रवाई भी की जाती है। होली त्योहार को देखते हुए छह टीम निरंतर कार्य कर रही हैं। जांच करके नमूना लिया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद जिन दुकानों में मिलावटी पाई जाता, दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
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-गिरिश दुबे, सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सिद्धार्थनगर
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