सिद्धार्थनगर। अगर दवा लेने जाएं तो थोड़ा सावधान रहें। बाजार में गोरखपुर से आई नकली और अधोमानक दवाओं की खेप खपाई जा रही है। ये दवाएं भारी-भरकम छूट का प्रलोभन देकर खरीदारों को दी जा रही हैं। ये दवाएं निष्प्रभावी हैं, ऐसे में दवा की सही डोज न मिलने से मरीज की तबीयत गंभीर भी हो सकती है। ड्रग विभाग की रिपोर्ट भी यह बता रही है कि बाजार में नकली और हूबहू नाम से मिलने वाली दवाएं बिक रहीं है। नौ मामले ऐसे पकड़ जा चुके हैं, जिनमें दवाओं के नमूने जांच में मानकविहीन होने की पुष्टि हुई है।
ऐसे में अगर कोई मेडिकल स्टोर संचालक आपको यह कहकर दुकान पर लेकर जा रहा है कि हम मूल्य से इतनी कम दर पर दवाएं देंगे, तो सावधान हो जाएं। दवा या तो नकली होगी, या फिर नाम तो वही होगा, लेकिन फार्मूला में अंतर होगा। जो सेहत को सही करने का काम कम और बिगाड़ने का अधिक करेगी।
बड़ी छूट का देते हैं लालच
अक्सर देखने में आता है कि मेडिकल स्टोरों पर अच्छी दवाओं पर भारी-भरकम छूट देने की बात दीवार पर लिखी होती है। जहां 10 से 20 प्रतिशत और कुछ स्थानों पर तो 40 प्रतिशत तक छूट देने की पेशकश कर देते हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह लोग इसलिए ऐसा कर देते हैं कि दो दवाएं ब्रांड की सही देंगे तो चार दवाएं दूसरी दे देंगे। जिससे उनकी मोटी कमाई हो जाती है और मरीज को लगता है कि हमें कम दर पर दवा मिल गई। लेकिन होता यह है कि वे दवाएं काम ही नहीं करती हैं।
सरकारी अस्पतालों के ईद-गिर्द ऐसे मेडिकल स्टोर ज्यादा अधिकांशत: सरकारी अस्पतालों के आसपास बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। इसमें लगभग हर चिकित्सक के कक्ष के आसपास मेडिकल स्टोर का व्यक्ति मंडराता रहता है। जैसे ही मरीज बाहर निकलता है, झट से उसके पीछे लग जाता है। आखिरी में यह होता है कि सस्ती दर की बात करता है फिर मरीज उसके साथ चला जाता है। जिससे वह मोटी रकम बना लेता है।
मेडिकल स्टोर पर मिल चुकी है मानक विहीन दवाएं
इसी वर्ष ड्रग विभाग की टीम ने सूपा, ककरहवा और बढनी में मेडिकल स्टोर पर छापा मारा। यहां से मानक विहीन यानी मिस ब्रांड दवाएं मिली थीं। जिसका सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। मामले की जांच अभी जारी है।
80 में नौ नमूने मिले मिस ब्रांड
विभाग की ओर एक साल में 80 दवाएं संदिग्ध मिलने पर नमूना जांच के लिए भेजा था। जिसमें नौ मिस ब्रांड मिले हैं। जिन पर कार्रवाई के लिए विभागीय लिखापढ़ी शुरू कर दी गई है। जल्द ही इन पर कार्रवाई हो सकती है।
क्या है मिस ब्रांड
ड्रग विभाग के मुताबिक दवाओं की जांच में जो मिस ब्रांड मिलता है। उसका अर्थ यह है कि दवाओं पर जो दावा किया है, जो पदार्थ मिले होने और फार्मूला की बात लिखी है। वास्तव में वह दवा में मिले ही नहीं है। ऐसे में वह फायदा करने के बजाए लंबे समय तक सेवन करने पर नुकसान करता है।
मेडिकल स्टोर किया था सीज
ककरहवा कस्बे में दिसंबर माह में ड्रग और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने छापा मारा था। यहां नकली दवाओं की बिक्री होने की सूचना थी। जांच में मेडिकल स्टोर से संंबंधित दस्तावेज नहीं मिले थे। इसके साथ ही कई दवाओं का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजते हुए मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया था।
जिले की टीम ने बस्ती में पकड़ी थी सिरप की खेप
ड्रग इंस्पेक्टर नवीन की अगुवाई टीम ने करीब दो माह पहले बस्ती जिले हरैया थाना क्षेत्र एक ट्रक से प्याज की बोरियों के बीच से 90 लाख रुपये का सिरप पकड़ा था। जो उत्तराखंड से आ रहा था, सीमावर्ती क्षेत्र के अलावा बिहार और बंगाल के रास्ते नेपाल तक आपूर्ति होने की बात सामने आई थी।
गोरखपुर से आती हैं जिले में दवाएं
तीन दिन पहले एसटीएफ ने गोरखपुर में नकली दवाओं के साथ दो लोगों को पकड़ा था। जो दवाओं को लेकर नेपाल में जाते थे। दवाओं के नकली होने की बात सामने आई थी। गोरखपुर से जिले के मेडिकल स्टोर पर दवाएं आती हैं। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि यहां पर भी गोरखपुर मंडी से आने वाली नकली दवाएं बिक रही हैं।
डॉक्टर के पास पहुंचे तो दवा देखते ही भड़क गए
जोगिया क्षेत्र के रहने वाले पवन जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए गए थे। उनके पेट दर्द था। चिकित्सक ने पांच दिन की दवा लिखी। पांच दिन दवा खाने के बाद पहुंचे तो कहा साहब तबीयत ठीक होने के बजाय और बिगड़ गई। इस पर चिकित्सक ने दवा का रैपर मांगा, तो सब दवाएं कम डोज और दूसरी कंपनी थीं। इस पर वह झल्ला गए और दवा खरीदने के बाद लाकर दिखाने के लिए कहा।
सब दवाएं दूसरी दे दीं
नगर के निवासी विजय कुमार को चक्कर आ रहे थे। उन्होंने जिला अस्पताल में एक चिकित्सक को दिखाया था। डॉक्टरों ने सिटी स्कैन जांच करने के बाद दवा लिखी। बाहर से वह दवा खरीद कर लेकर आए। जब डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि सभी दवाएं दूसरी हैं। डॉक्टर ने तत्काल दवा बदलने और किसी अच्छी दुकान से दवा लेकर आने के लिए कहा।
नकली दवाएं खराब कर देंगी किडनी
नकली और गलत दवाओं के सेवन से किडनी और लीवर सब खराब हो सकता है। इसके सेवन से जान भी जा सकती है। कई बार मरीजों को जो दवाएं लिखी जाती हैं। उन्हें मेडिकल स्टोर पर गलत दे दिया जाता है। मरीजों को समझाया भी जाता है। जहां तक हो सके, प्रयास रहे अच्छी दवा लें। चिकित्सक को दिखाकर ही खाएं।
- डॉ. सीबी चौधरी, चिकित्सक, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
सीमा पर लगातार पकड़ी जा रही हैं दवाएं
नवंबर 2021 से अबतक एसएसबी की ओर से सीमावर्ती क्षेत्र के ककरहवा, खुनुंवा और अलीगढ़वा बार्डर से नौ बार दवाओं की खेप पकड़ी जा चुकी हैं। इसमें नींद की दवाएं और सिरप भी बरामद हुआ है। हालांकि बड़ी खेप अभी तक नहीं पकड़ गई है। कैरियर ही लेकर जाते हुए पकड़े गए हैं। एसएसबी के जवानों की सतर्कता के नौ बार दवा के तस्कर हाथ लगे हैं।
इस पर करते हैं जांच
अगर कहीं सस्ती दर पर दवा देने की बात कही जा रही है तो समझ लीजिए की आपके साथ धोखा हो रहा है। मानक विहीन और लोकल दवा दी जा रही है। क्योंकि ब्रांड की दवाओं पर छूट की कोई गुंजाइश नहीं रहती है। ड्रग विभाग की टीम लगातार छापे की कार्रवाई कर रही है।
- नवीन कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर सिद्धार्थनगर