सिद्धार्थनगर। जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में 18 साल पहले एक करोड़ रुपये की लागत से बने बहुउद्देशीय हाल को कोच का इंतजार है। प्रशिक्षक न होने से उभरती प्रतिभाएं मायूस हो रही हैं। वहीं, इतने अधिक बजट से बने हाल में बैडमिंटन कोर्ट की पट्टियां भी उखड़ने लगी हैं।
स्टेडियम में 2005 में एक करोड़ की लागत से हॉल बनाया गया। यहां बैडमिंटन, टेनिस, जूड़ो, जिम्नास्टिक की प्रैक्टिस हो सकती है, लेकिन कोच की नियुक्ति नहीं हुई। जो खिलाड़ी बैडमिंटन खेलना भी चाहें, वे भी विद्यालय स्तर तक ही खेल पाते हैं। इस हाॅल में उभरते खिलाड़ी प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। शहर के कुछ लोग यहां बिना कोच के ही शौक पूरा करने आते हैं।
बीच में लगी नेट को टाईट रखने के लिए ईंट का सहारा लिया गया है। वहीं, हाॅल के लाइटें भी खराब हो चुकी हैं। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। हाल के पीछे झाड़ लगे हैं। इस कारण जहरीले जीव-जंतुओं के अंदर प्रवेश करने की आशंका बनी रहती है। हाल में खेलने वाले लोगों को मच्छरों का दंश भी झेलना पड़ता है।
स्कूल में बैडमिंटन खेलती थी, आगे भी खेलना चाह रही थी, लेकिन कोच न होने से खेल में मदद नहीं मिली। इस कारण खेलना छोड़ना पड़ा।
- अंजली रस्तोगी
मुझे बैडमिंटन खेलना पसंद है। विद्यालय स्तर तक बैडमिंटन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान भी प्राप्त किया, लेकिन कोच न होने से आगे नहीं खेल पाई-
अर्शी
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स्टेडियम में अभी तक कोई कोच नहीं आया। कोच होते तो यहां से भी बैडमिंटन के खिलाड़ी निकलते जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जिले का मान बढ़ा सकते थे।
आंचल वर्मा
मैं बैडमिंटन खेलना चाहती थी, लेकिन कोच नहीं होने के कारण वॉलीबाॅल खेल रही हूं। बैडमिंटन का प्लेटफार्म मिला होता तो संभव था कि मैं और अधिक सफल खिलाड़ी होती।
सुंदरी
वर्जन
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में बहुउद्देशीय हाल बना है। उसकी मरम्मत भी कराई जाती है। कोच की नियुक्ति के लिए खेल निदेशालय को पत्र भेजा गया है।
- आशुतोष अग्निहोत्री, क्रीड़ाधिकारी