फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: एटीएस के हाथ लगे सुराग...रविकेश के जिले से भी जुड़ सकते हैं लिंक

Tue, 27 Aug 2024 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले में संतकबीरनगर, गोरखपुर सहित कई जिलों तक लिंक जुड़ने की आशंका
विज्ञापन

पूछताछ में उसके भेजे लिंक से 4100 लोगों के जुड़े होने और 1500 सक्रिय होने की सामने आई है बात
सहज जनसेवा केंद्र संचालक मिलकर करते हैं फर्जीवाड़ा
नेपाल सीमा से सटे कोटिया में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और आधार बनाने वाले गैंग का हुआ भंडाफोड़
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। रायबरेली जनपद में रोहिंग्या के जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले का एसटीएफ के भंडाफोड़ के बाद पूरी व्यवस्था पर सवाल उठा गया था। जांच में पूर्वी यूपी में भी फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया था। बिहार के मुख्य सरगना से मिले इनपुट के आधार पर आशंका जाहिर की जा रही है कि सिद्धार्थनगर से भी उक्त फर्जीवाड़े के लिंक जुड़ सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, एजेंसी की पूछताछ में प्रदेश के सोनभद्र, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, प्रतापगढ़, आंबेडकर नगर, महराजगंज, प्रयागराज, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, बलिया, बहराइच, अमेठी जिलोंं में फर्जी तरीके से प्रमाणपत्र तैयार करने वालों की सक्रियता के इनपुट मिले हैं। ऐसे में यह आशंका वाजिब लगती है कि सिद्धार्थनगर से भी आरोपियों के कनेक्शन जुड़े हो सकते हैं। डेढ़ माह पहले नेपाल की सीमा से सटे कोटिया कस्बे में दो लोग पकड़े गए थे, यह फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड बनाने का कार्य करते थे। इन्होंने भी एक लिंक मिलने और उसके जरिए कार्ड बनाने की बात बताई थी। रविकेश ने भी लिंक भेजने की जानकारी दी है।
विज्ञापन

गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार की ओर से आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे सरकारी कार्य या निजी हर जगह प्रमाण के रूप में आधार लिया जाता है। विदेशी लोगों के घुसपैठ को लेकर विशेष करके रोहिंग्या बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं। प्रदेश के रायबरेली जनपद में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह को पर्दाफाश हुआ था। कई लोग जेल गए थे। उनसे मिले इनपुट के बाद टीम जांच कर रही थी।
किसी के दूसरे के हैंडलर होने के इनपुट के बाद जांच जारी थी। इसी बीच बिहार के दरभंगा निवासी रविकेश को पकड़ा गया जो मास्टर माइंड है। एजेंसी को पूछताछ में मिले इनपुट में यूपी के सोनभद्र, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, प्रतापगढ़, आंबेडकर नगर, महराजगंज, प्रयागराज, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, बलिया, बहराइच, अमेठी जिलोंं में प्रमाणपत्रों के फर्जीवाड़ा में भी इसी का हाथ रहा है। पुलिस के अनुसार रविकेश जेल भेजे गए आरोपियों से भी बातचीत करता था। ऐसे में कॉल डिटेल, व्हाट्सएप ग्रुप, लैपटॉप व कंप्यूटर खंगाले गए तो रविकेश के फर्जीवाड़े में शामिल होने की जानकारी मिली। सबसे बड़ा खुलासा उसने यह किया है कि रविकेश के पोर्टल से जुड़े थे 4100 यूजर
रविकेश फर्जी प्रमाणपत्र बनाने के लिए वर्ष 2022 में डब्लूडब्लूडॉटसीआरएसओजीओवीआरडॉटइन और वर्ष 2023 में डब्लूडब्लूडॉटटीएचईडीएएसएचबीओएआरडीडॉटइन नाम से पोर्टल तैयार किया। फेसबुक पेज के माध्यम से उत्तर प्रदेश व बिहार के लोगों को फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले गैंग में शामिल किया, जिसमें बहुत से जन सेवा केंद्र संचालक भी थे। उसके पोर्टल पर करीब 4100 यूजर हैं, जिसमें 1500 सक्रिय हैं। उनके माध्यम से वह प्रतिदिन दो से तीन हजार रुपये कमा लेता था। सिद्धार्थनगर में शोहरतगढ़ पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने नेपाल सीमा से सटे कोटिया से जनसेवा केंद्र संचालक और बढ़नी बार्डर पर केंद्र चलाने वाले दो लोगों को पकड़ा था, जो फर्जी तरीके से जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड बनाने कार्य करते थे। इनके कब्जे से कई साक्ष्य बरामद हुआ था। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि रविकेश के ग्रुप से जुड़े 1500 लोग में यह नहीं हो सकते है। फिलहाल यह जांच का विषय है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने बताया कि पुलिस की ओर से फजीर् जन्म प्रमाण पत्र और आधार करने वालों को पकड़ा गया था। इस पर टीम काम कर रही है। जहां से शिकायत मिलती है, जांच करके कार्रवाई की जाती है।
-
एक लिंक से बनाते थे फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
पुलिस के हाथ लगे दोनों आरोपियों ने पूछताछ में बताया था, उसका भाई एक लिंक दिया था जो कंप्यूटर का जानकार है। उसके दिए गए लिंक के जरिए कार्ड बनाने का कार्य करते थे। वाकई में आरोपी का भाई था या फिर लिंक इसी गिरोह से उसका लिंक मिला था, यह जांच का विषय है।
-
सीमा पर पकड़ में आया था मामला

15 जुलाई को एसओजी और शोहरतगढ़ पुलिस की संयुक्त टीम ने फर्जी आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को कोटिया कस्बे से दबोच लिया। उनके कब्जे से लैपटॉप, फर्जी प्रमाण पत्र सहित अन्य सामान बरामद किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई ने फर्जीवाड़ा करने वालों को तो हिला दिया। लेकिन यह धंधा कब से चल रहा था, कितने लोग फर्जी तरीके से आधार कार्ड हासिल करके गैर देश के नागरिक होते हुए यहां लाभ ले चुके होंगे। दुकान मकान बना चुके हैं। शायद इस बात का किसी को अंदाजा नहीं है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। अगर तह तक पहुंच गई तो बड़ा खुलासा होगा। इस संबंध में एसपी प्राची सिंह ने बताया कि जहां से भी शिकायत मिलती है, पुलिस जांच करके कार्रवाई करती है। पुलिस की ओर से पूर्व में फर्जीवाड़ा करने वाले पकड़ा था, उन्हें जेल भेजा गया था, जहां से भी शिकायत मिलती है, पुलिस जांच करके कार्रवाई करती है।
विज्ञापन

-

मुंबई में पकड़ में आया यहां का फर्जीवाड़ा
बीते माह डुमरियागंज में मुंबई पुलिस की टीम आई थी। यहां से दो संदिग्धों को पुलिस ने उठाया था। पुलिस टीम ने बताया कि यहां से जन्म प्रमाण पत्र और फिर आधार कार्ड बनाया गया था। पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया था। जांच में कार्ड फर्जी मिला था। इसके बाद स्थानीय थाने में जालसाजी का केस दर्ज किया गया। जांच में पाया गया कि कार्ड डुमरियागंज से बना था। इसलिए दोनों को पकड़ा गया है। वह कितने दिन से कार्य कर रहा है। इसकी जांच चल रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें