सिद्धार्थनगर। जिले में पशु तस्करों को बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में पशु तस्करों पर सख्ती बढ़ी तो वह बीच का रास्ता तलाश लिए हैं। पहले नेपाल वाया बिहार लेकर जाते थे। अब वह बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर फिर बिहार में पहुंचा रहे हैं। बांसी कोतवाली क्षेत्र में पशु तस्करों के पकड़े जाने पर यह बात सामने आ रही है। लोगों को कहना है कि सिस्टम में तगड़ी पैठ की देन है कि तस्कर सामने आने वालों को उड़ाने से परहेज नहीं कर रहे हैं। अगर सख्ती होती तो शायद इस मार्ग से होकर पशु तस्करों की गाड़ी आगे नहीं बढ़ती। आठ माह पूर्व पकड़े गए बिहार गैंग के तस्कर भी इसी मार्ग से निकल रहे थे। बेलनबवा में हुई पशु तस्करों के वाहन से हुआ हादसा इस बात की गवाही दे रहा है कि जनपद में बड़े पैमाने पर पशु तस्करी हो रही है।
बांसी कोतवाली क्षेत्र के बेलबनवा गांव के पास रविवार रात पशु तस्करों की पिकअप ने तेजी के निकलने के चक्कर में बाइक सवार युवकों को टक्कर मार दी। हादसे में उनकी जान चली गई। मौके से दो लोगों पकड़े गए जो बिहार के पशु तस्करी करने वाले गैंग के सदस्य हैं। पुलिस ने बिहार का होने दावा तो किया, लेकिन यह बात छिपा रही है कि उसकी नाकामी से पशु तस्करी हो रही है। सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए दोनों तस्करों ने बताया था कि वह बलरामपुर जनपद से पशुओं को लादकर सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और गोरखपुर फिर कुशीनगर के रास्ते बिहार लेकर जा रहे थे। हालांकि इस बात से पुलिस इन्कार कर रही है कि पशु बलरापुर से लेकर आ रहे थे। लेकिन यह भी नहीं बताया कि कहां से लेकर जा रहे थे। जबकि पहले नेपाल बार्डर एरिया पशु तस्करों का केेंद्र रहा।