सिद्धार्थनगर। बेसिक शिक्षा विभाग में विद्यालयों को निपुण बनाने के लिए बनाए गए एआरपी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उनके मूल पद पर नहीं भेजा गया है, जबकि अनेक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। निपुण लक्ष्य प्राप्त करने के लिए जिले के प्रत्येक ब्लॉकों में पांच-पांच एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) की तैनाती की गई थी। जिनका कार्यकाल मार्च 2024 में ही समाप्त हो गया, लेकिन अभी तक इन एआरपी को कार्यमुक्त कर विद्यालयों पर वापस नहीं किया, जबकि अभी तक नियुक्त किए गए एआरपी निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष निपुण विद्यालय बनाने के कार्य में असफल साबित हो रहे हैं।
शासन की ओर से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कक्षा एक से तीन के छात्रों के लिए भाषा और गणित में दक्षता निर्धारित की गई है। जिसे निपुण लक्ष्य का नाम दिया गया हैं। निपुण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षकों के सहयोग के लिए प्रत्येक विकास खंड में हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय के महारत रखने वाले शिक्षकों को एआरपी बनाया गया है। 2021 में एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) के पद पर पदस्थापित करके इनकी जिम्मेदारी तय की गई थी।
उन्हें संबंधित विकास क्षेत्र के विद्यालयों का सुपरविजन करते हुए शिक्षकों का शैक्षिक सपोर्ट करें और स्वयं 10 विद्यालयों को गोद लेकर उसे सबसे पहले निपुण बनाकर क्षेत्र में मिसाल कायम करें। प्रत्येक एआरपी को प्रतिदिन दो विद्यालय का सुपरविजन करना था और सुपरविजन करने वाले विद्यालयों की सूची जारी करने का नियम था। लेकिन यह एआरपी शैक्षिक सपोर्ट के बजाए आकस्मिक रूप से निरीक्षण के लिए विद्यालय जाते थे और फोटो एवं वीडियो क्लिप शासन प्रशासन को सिर्फ दिखाते थे। यही वजह रहा कि इनके गोद लिए हुए विद्यालय का कोई भी बच्चा निपुण नहीं हो पाया।
उन्नाव की तरह कराया जाए वापसी
निपुण विद्यालय बनाने में असफल हो चुके एआरपी को अपने मूल विद्यालय पर वापसी की मांग तेज हो गई है। शिक्षक संगठन से जुड़े पदाधिकारी इन एआरपी को उन्नाव की तरह विद्यालयों पर वापस किए जाने की जरूरत बता रहे है। उनका कहना है कि उन्नाव जिले में अपने कार्य में फिसड्डी साबित हुए 17 एआरपी को बीएसए ने मूल विद्यालय पर वापस कर दिया। इसी तरह का निर्णय यहां भी होना चाहिए।
शिक्षकविहीन हैं विद्यालय
जिले में सैकड़ों विद्यालय शिक्षक विहीन हैं, अगर इन एआरपी को वापस कर बंद विद्यालयों पर तैनात कर दिया जाए, तो बंद विद्यालयों की दशा और दिशा सुधर होगी। जिले में शिक्षकों की कमी है, फिर भी जिले के 70 शिक्षकों को एआरपी बनाया गया, जोगिया बर्डपुर से दो लोगों के त्याग पत्र से जिले में कुल 68 एआरपी हैं। जिले में सैकड़ों विद्यालय पहले से ही बंद हैं, इनके एआरपी बनने से बंद विद्यालयों की संख्या में इजाफा ही नहीं हुआ बल्कि उसके संचालन और नामांकन पर भी असर हुआ।
एआरपी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन एआरपी को उनके मूल पद पर भेजने के लिए शासन के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। पिछले बार हुए सर्वे में जिले के 44 विद्यालय निपुण बने थे, फिलहाल इस वर्ष सर्वे नहीं हुआ है। एआरपी का कार्य अध्यापकों का सहयोग करना होता है, शेष वहां के अध्यापक ही विद्यालय को निपुण बनाते हैं।
-देवेंद्र कुमार पांडेय, बीएसए