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Siddharthnagar News: गांवों में शुरू हुआ पुरातात्विक सर्वेक्षण

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कपिलवस्तु क्षेत्र में पुरातात्विक स्थल पिपरी। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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गांवों में शुरू हुआ पुरातात्विक सर्वेक्षण
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सिद्धार्थनगर। महात्मा बुद्ध की क्रीड़ा स्थली कपिलवस्तु क्षेत्र में पुरातात्विक सर्वेक्षण शुरू हो गया है। केंद्रीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग ने गांवों का सर्वेक्षण दिसंबर में शुरू किया।
कपिलवस्तु स्तूप के आसपास कई स्तूप (टीले) हैं, जिनकी खुदाई होने पर प्राचीनता के और अधिक साक्ष्य प्राप्त हो सकते हैं। इस क्षेत्र में अवैध खुदाई के कारण करीब 500 ईसा पूर्व के स्तूपों का अस्तित्व संकट में पड़ गया था, जबकि पुरातत्व विभाग की ओर से उत्खनन होने पर कपिलवस्तु क्षेत्र में धरोहरों की संख्या बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार सर्वेक्षण में प्राचीन टीलों के उत्खनन का रास्ता साफ होगा। अधिक साक्ष्य प्राप्त हुए तो यहां शोध की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। इसके साथ ही विदेशी शोधार्थियों का रुझान भी बढ़ सकता है। सहायक पुरातत्वविद विकास सिंह ने गांवों का सर्वेक्षण शुरू किया है, हालांकि, उन्होंने रिपोर्ट नहीं भेजी है। जिले के सभी गांवों में पुरातात्विक सर्वेक्षण होना है।
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पीएमओ में हुई थी शिकायत
अमर उजाला ने 6 मार्च 2022 को प्राचीन स्तूप की जेसीबी से खुदाई की खबर प्रकाशित की थी, उसके बाद प्राचीन धरोहर के संरक्षण की मुहिम शुरू हुई। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीता यादव ने इस मामले में पीएमओ को ई-मेल भेजा था। उसके बाद सितंबर 2022 में भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग लखनऊ मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद ने जिले के सभी गांवों में पुरातात्विक सर्वेक्षण का आदेश दिया। डॉ. नीता यादव ने बताया कि उत्खनन होने पर स्तूप में दबी पुरातात्विक संपदा का भी पता चलेगा। कपिलवस्तु के अलावा पिपरहवा, गनवरिया, सलारगढ़, पिपरी में भी पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त होने की संभावना है।
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सिद्धार्थनगर जिले के गांवों में पुरातात्विक सर्वेक्षण शुरू हो गया है। दिसंबर से ही सर्वेक्षण कार्य हो रहा है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जो भी संभावनाएं होंगी, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. आफताब हुसैन, अधीक्षण पुरातत्वविद, लखनऊ मंडल
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