पुरातात्विक धरोहरों का पता लगाने के लिए सभी गांवों का होगा सर्वे
सिद्धार्थनगर। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने पुरातात्विक धरोहरों का पता लगाने के लिए जिले के सभी गांवों का सर्वेक्षण कराने का आदेश जारी किया है। सर्वेक्षण से कपिलवस्तु एवं आसपास के क्षेत्रों में बौद्धकालीन साक्ष्य प्राप्त होने की उम्मीद है। इससे आकांक्षी जिले के विकास की संभावना बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्खनन होने पर जिले में नेपाल के लुंबिनी से भी अधिक ऐतिहासिक साक्ष्य प्राप्त हो सकते हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग लखनऊ मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद ने जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर सभी गांवों में सर्वेक्षण के लिए सहयोग मांगा है। सहायक पुरातत्वविद विकास सिंह जिले की 1136 ग्राम पंचायतों में सर्वेक्षण करेंगे। हालांकि, यह सर्वेक्षण नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र कपिलवस्तु एवं आसपास के क्षेत्रों के लिहाज से अधिक महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वेक्षण के बाद प्राचीन धरोहरें सामने आएंगी। विभाग में प्राचीन स्तूप सूचीबद्ध हो जाएंगे तो संरक्षण कार्य में आसानी होगी। यह रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी तो उत्खन्न की संभावना बढ़ जाएगी। जिले में 1970-72 में गनवरिया स्तूप का उत्खन्न हुआ है, जबकि इस क्षेत्र के आसपास भी उत्खनन की संभावना है।
उत्खनन होने पर स्तूप में दबी पुरातात्विक संपदा का भी पता चलेगा। भारतीय पुरातत्व विभाग ने कपिलवस्तु के अलावा पिपरहा, गनवरिया, सालारगढ़ एवं पिपरी को संरक्षित घोषित किया है।
शिकायत पर बंद हुआ था अवैध खनन
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीता यादव ने कपिलवस्तु क्षेत्र में लाला पंचगवां में प्राचीन टीले की अवैध खुदाई के मामले में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को मैसेज किया था। अमर उजाला ने 6 मार्च 2022 को इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो खनन कार्य बंद हो गया। लेकिन, सर्वेक्षण नहीं होने के कारण संरक्षण के संबंध में अनिश्चितता की स्थिति थी।
पीएमओ को भेजा था ई मेल
अवैध खनन की खबर मिलने के बाद एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीता यादव ने क्षेत्र की प्राचीन धरोहरों की रिपोर्ट तैयार की। उन्होंने पीएमओ को ई मेल के माध्यम से जानकारी दी कि अवैध खनन होने से पुरातात्विक साक्ष्य मिटने की आशंका है। उसके बाद पीएमओ ने विभागीय विशेषज्ञों से रिपोर्ट मांगी थी। छह माह बाद सर्वेक्षण का आदेश हुआ है।
लुंबिनी से भी अधिक मिल सकते हैं साक्ष्य
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीता यादव ने बताया कि प्राचीन इतिहास की दृष्टि से सर्वेक्षण बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। कई लेखकों ने जिक्र किया है कि कपिलवस्तु क्षेत्र के स्तूप में ईंट निर्मित आकृतियां और इमारतों के अवशेष नजर आते हैं, यहां उत्खनन की आवश्यकता है, जो सर्वेक्षण के बाद ही संभव है। 500 ईसा पूर्व बुद्धकालीन दौर था, यहां नेपाल के लुंबिनी से अधिक साक्ष्य प्राप्त हो सकते हैं। ऐसे साक्ष्य प्राप्त होने पर शोध के अवसर बढ़ेंगे, देश विदेश के विद्वान आएंगे और विकास की संभावना बढ़ जाएगी।
केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम गांवों में सर्वेक्षण कार्य करेगी। सभी तहसीलों के गांवों में सर्वेक्षण कार्य किया जाएगा। इस कार्य में राजस्व कर्मी भी सहयोग करेंगे। -जयेंद्र कुमार, सीडीओ/ प्रभारी जिलाधिकारी