सकारपार। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित निष्प्रयोज्य हो चुके भवनों का ध्यान देने वाला कोई नहीं है। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे मध्यावकाश में खेलकूद करते समय जर्जर भवन के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं। इससे बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकता है।
विद्यालय से जर्जर भवन की सूचना देने के बावजूद विभागीय शिथिलता का परिणाम है कि अब तक इन जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण नहीं हो सका है। ये कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। बांसी क्षेत्र के गोनहा डीह गांव में लगभग चार दशक पूर्व प्राथमिक विद्यालय भवन का निर्माण हुआ था। जो अब पूर्ण रूप से निष्प्रयोज्य हो चुका है। भवन जर्जर होने के बाद विभाग ने लगभग एक दशक पूर्व बगल में नए भवन का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन पुराने भवन का ध्वस्तीकरण अभी तक नहीं कराया। विद्यालय में कुल नामंकित छात्रों की संख्या 187 है।
विद्यालय का किचन सेड जर्जर भवन के बगल में बना है। इससे मध्यावकाश में बच्चे भोजन करने के लिए जर्जर भवन के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य चंद्र प्रकाश राय का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए मध्यावकाश में विद्यालय में तैनात स्टॉफ की बाकायदा ड्यूटी लगती है, ताकि कोई छात्र जर्जर भवन के आसपास न जाने पाए।
जर्जर विद्यालयों की सूची जिले पर भेज दी गई है। सर्वे का काम चल रहा हैं। सर्वे पूरा होते ही जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण करवाया जाएगा।
-अखिलेश सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, बांसी