हल्लौर कस्बे में जगह-जगह आयोजित हुई मरसिया मजलिस, रखे गए ताजिये
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद और उनके नवासे हजरत इमाम हसन के शहादत दिवस पर शुक्रवार को शिया संप्रदाय के प्रमुख स्थान हल्लौर में मरसिया मजलिस आयोजित की गई। अलम और ताबूत का जुलूस निकालकर अकीदतमंदो ने नौहा-मातम कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा और शिया समुदाय के दूसरे इमाम हसन के शहादत दिवस पर बृहस्पतिवार रात हल्लौर कस्बे में इमामबाड़ा और घरों पर छोटे-बड़े भारी संख्या में ताजिये रखे गए। जहां सारी रात जागकर लोगों ने नौहा मातम किया। शुक्रवार दोपहर 3:30 पर हल्लौर स्थित तवनगर हुसैन और तौकीर हसन के आवास पर मरसिया मजलिस हुई। जिसमें हजरत मोहम्मद और इमाम हसन की शहादत को विस्तार से बयां किया गया। जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने कहा कि मुसलमानों के लिए आज शोक और गम का दिन है। एक ही दिन नाना और नेवासे दोनों की शहादत की तारीख है। दोनों को जहर देकर इंसानियत और मानवता के दुश्मनों ने शहीद किया था। मजलिस के बाद अंजुमन फरोग मातम और अंजुमन गुलदस्ता मातम द्वारा अलम और ताबूत का जुलूस निकाला गया, जो नौहा और मातम के बीच जन्नतुलबकी होते हुए देर शाम कर्बला पहुंचकर समाप्त हो गया। इससे पूर्व बृहस्पतिवार रात बड़ा इमामबाड़ा पर अंजुमन गुलदस्ता मातम द्वारा आयोजित सालाना अशरे की आठवीं मजलिस को शिया धर्मगुरु एवं राष्ट्रीय विद्वान मौलाना कल्बे जव्वाद ने कुरान और हजरत अली की फजीलत पर विस्तार से रोशनी डाली और लोगों से हजरत अली के बताए हुए नेकी, भलाई, हक सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने की अपील की।
मजलिस से पहले मर्सियाख्वानी शाहिद आलम और उनके सहयोगी ने की। मजलिस में भारी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। इस दौरान काजिम रजा, डॉ. वजाहत हुसैन, फहीम हैदर, नौशाद हैदर, नफासत रिजवी आदि मौजूद रहे।