उसका बाजार। हिंसा की आग में जल रहे अफ्रीकी देश सूडान में ऑपरेशन कावेरी चलाकर भारत सरकार ने अब तक वहां से करीब दो हजार भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सुरक्षित घर वापस आने वाले में विकास क्षेत्र उसका बाजार के भी तीन लोग हैं। सूडान का खौफनाक मंजर बयां करते हुए सोमवार को सकुशल घर पहुंचे लोगों की आंखें भर आईं।
उसका थाना क्षेत्र के बैरवां नानकार निवासी धनंजय सिंह (28) ने बताया कि वह छह वर्ष से सूडान की राजधानी खारतुम में मैकेनिकल इंजीनियर पद पर कार्य कर रहे थे। इस बार वह अप्रैल 2022 में गए थे, माहौल खराब होने केे बाद दिन गुजारना कठिन हो गया था, भारत सरकार के सहयोग से वह घर वापस आ सके। बताया कि पहले छिटपुट घटनाएं होती थी, लेकिन 15 अप्रैल से हालात बेकाबू गया। चारों तरफ गोलियों की आवाज, चीखते पुकारते लोगों को देख अपने जान की सुरक्षा की चिंता सताने लगी थी। इनके पिता सुरेंद्र प्रताप सिंह, माता संगीता सिंह, पत्नी अमृता सिंह, भाई रणंजय सिंह व मृत्युंजय सिंह सकुशल वापसी के लिए परेशान थे। क्षेत्र के नगवां गांव निवासी शहजाद अहमद (30) ने बताया कि वह सूडान की राजधानी खारतूम के बगल में अलबागैर में एक खाद कंपनी में काम कर रहे थे ।शुरुआत में पता चला कि सूडान छोड़कर लौट रहे अमेरिकी लोगों को सुरक्षा बल लूट रहे हैं। हमें चिंता हुई कि हमारा क्या होगा। लेकिन जब हम निकले तो भारत के पासपोर्ट को देखते ही सुरक्षा बल मैत्रीपूर्ण ढंग से बात करने लगे। सेखुई निवासी महेंद्र यादव (35) ने बताया कि वह सूडान में एक एल्युमिनियम फैक्ट्री में कार्य करते थे, हालत बिगड़ने पर घर पहुंचने की चिंता सताने लगी। घर आने पर उनकी पत्नी उर्मिला समेत परिजनों ने राहत की सांस ली।
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दुर्दशा की कहानी पीड़ितों की जुबानी
उसका बाजार। सूडान में 15 अप्रैल को शुरू हुए सत्ता संघर्ष के दौरान 23 अप्रैल तक हम एक भवन के मध्य में बने बड़े हाल में सात लोग ठहरे थे। हाल के चारों तरफ कमरे थे, जिससे गोलियां उन तक नहीं पहुंच सकती थीं। यह सुरक्षित ठिकाना था। खाना करीब 15 दिन का जरूरत के हिसाब से पहले रखा था, लेकिन घर जाने की चिंता में भूख किसे लगती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उच्चस्तरीय बैठक के बाद सूडान में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने हमारे एक व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज किया कि अपनी डिटेल भेजो। अगले दिन हमें पोर्ट सूडान पहुंचने को कहा गया।
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जेद्दाह के रास्ते पहुंचे भारत
उसका बाजार। सूडान से घर आए धनंजय सिंह, शहजाद और महेंद्र यादव ने बताया कि वे खारतूम में एयरपोर्ट से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर रहते थे लेकिन एयरपोर्ट के ध्वस्त होने के कारण उन्हें समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ा। सत्ता संघर्ष के कारण हवाई अड्डे का काफी हिस्सा तबाह कर दिया है। यहां से उड़ान संभव नहीं है, इसलिए 800 किलोमीटर दूर सूडान पोर्ट से उन्हें समुद्री जहाज के जरिये जेद्दाह पहुंचाया गया और वहां से फ्लाइट के जरिए भारत पहुंचे।
संवाद