- 16 करोड़ रुपये से अधिक लागत से लगाए जाएंगे जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ट्यूबवेल
- असिंचित क्षेत्र जहां नहीं जाता है नहर का पानी वहां ट्यूबवेल से पानी पहुंचाने की कवायद शुरू
- शासन की ओर से धन किया गया आवंटित, शुरू हो रहा कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। फसल की सिंचाई के लिए परेशानियों से गुजरने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। पानी की किल्लत से जूझने वाले असिंचित क्षेत्र में लगने वाले 52 ट्यूबवेल जल्द ही अस्तित्व में आ जाएंगे। क्योंकि शुरू हुई ट्यूबवेल लगाने की प्रक्रिया तेजी चल रही है। माना जा रहा है कि एक साल में सिंचाई व्यवस्था पटरी पर लौट आएगी। जो किसानों के लिए खुशहाली लगाएगी।
जनपद नेपाल बाॅर्डर से सटा होने के कारण तराई क्षेत्र में गिना जाता है। यहां 85 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है। यहां मुख्य रूप से दो प्रकार की फसलें लगाई जाती हैं। इसमें धान और गेहूं प्रमुख फसल है। जिले में नेपाल से कई नदियां आती हैं, लेकिन डैम आदि की व्यवस्था न होने से उस पानी का प्रयोग किसानों कि हित में नहीं हो पाता है। कारण डैम और उससे नहर निकाली जाए तो बात बनें।
कुछ ही क्षेत्र जैसे डुमरियागंज, सिद्धार्थनगर मुख्यालय और शोहरतगढ़ क्षेत्र में कुछ हिस्से की सिंचाई के लिए नहर की व्यवस्था है। बाकी फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को बोरिंग से काम चलाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें कड़ी मेहनत के साथ ही आर्थिक रूप से परेशान होना पड़ता है। जिले में सिंचाई के लिए असिंचित क्षेत्रों में ट्यूबवेल की व्यवस्था तो है, लेकिन बड़े रकबे की सिंचाई के लिए आज भी किसान जूझ रहे हैं। इसके लिए जिले में असिंचित क्षेत्र में जहां बहुत ही आवश्यक है। ऐसे जिले के 14 ब्लॉक क्षेत्र के 52 स्थानों पर ट्यूबवेल लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
इसमें एक ट्यूबवेल पर 35-40 लाख रुपये लागत आ रही है। 16 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है। इसमें काम तेजी से चल रहा है। जैसे-जैसे ट्यूबवेल तैयार होंगे चालू करते जाएंगे। कुल मिलाकर एक साल के भीतर सभी चलने लगेंगे। इससे किसानों के सामने से सिंचाई का संकट काफी हद तक दूर हो जाएगा।
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पाइप लाइन में होगा सुधार, ध्वस्त नहीं होगी नाली
नई योजना में बनने वाले ट्यूबवेल में अधिक से अधिक पाइप की व्यवस्था की गई है। इससे बीच में पानी की बर्बादी नहीं होगी। हर खेत तक पानी पहुंचेगा। जबकि पुरानी व्यवस्था में नाली सिस्टम होने के कारण सिंचाई के समय पड़ोसी का खेत भर जाता है। इससे जहां विवाद होने की स्थिति बन जाती है। वहीं, बार-बार मरम्मत करनी पड़ता थी, जबकि पाइप लगने से यह समस्या दूर हो जाएगी।
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इतने क्षेत्रफल की होगी सिंचाई
ट्यूबवेल संचालित करने वाले कर्मी के मुताबिक एक ट्यूबवेल से 700-800 बीघा फसल की सिंचाई होती है। यानी 50 ट्यूबवेल के शुरू होने से लगभग 45-47 हजार बीघा फसल की सिंचाई होने लगेगी। इससे बड़े असिंचित क्षेत्र के सिंचाई की सुविधा हो जाएगी। इससे जहां किसानों की लागत कम लगेगी। वहीं, पानी आसानी से मिल जाएगा।
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जिले में है इतने ट्यूबवेल
आकड़ों के मुताबिक जिले में 424 ट्यूबवेल हैं। इसमें डुमरियागंज सब डिविजन में 117, बांसी 133, नौगढ़ में 174 ट्यूबवेल चल रहे हैं। जहां से किसान फसलों की सिंचाई कर रहे हैं।
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बोले जिम्मेदार
ट्यूबवेल लगाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। जैसे-जैसे काम पूरा होता जाएगा, उसी के अनुसार उसे चालू करवा दिया जाएगा। एई को निर्देश दिए गए हैं, जो चल रही है, उनका संचालन सही से करवाएं।
-जयेंद्र कुमार, सीडीओ