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Siddharthnagar News: गुजर गए 35 साल... मिली तारीख पे तारीख, बुढ़ापे में भी केस के निपटारे की उम्मीद नहीं

Sat, 05 Aug 2023 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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वादकारियों को हर रोज लगाना पड़ता है चक्कर, निस्तारण की आस में गुजर रहा वक्त
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जमीन का विवाद निस्तारण कराना बहुत मुश्किल है। वर्ष 1988 से शुरू हुआ मुकदमा अब तक चल रहा है। बुढ़ापे में भी लगता है निस्तारण की उम्मीद नहीं है। तारीख पे तारीख देखते हुए 35 साल का लंबा समय गुजर गया। अब तो तहसील की अदालत में तारीख देखने की आदत सी बन चुकी है।
उसका क्षेत्र के महुलानी गांव निवासी रंगनाथ पांडेय से मुकदमे की बात शुरू की गई तो वह एक पल के लिए भावुक हो गए। निस्तारण की आस में उम्र के पहले पड़ाव से चौथे पड़ाव में पहुंच गए हैं, देखिए अब क्या होता है। 40 वर्ष से तहसील का चक्कर लगा रहे छितरापार निवासी 65 वर्षीय बेकारू राम कहते है कि मुकदमों के निस्तारण की धीमी प्रक्रिया के चलते वह कई वर्ष से तहसील और कलक्ट्रेट का चक्कर लगा रहे है। लेकिन मुकदमों से छुटकारा नहीं मिल रहा है, लगता है शेष उम्र भी मुकदमों की पैरवी में ही बीत जाएगी।
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प्रतिदिन तहसील नौगढ़ में स्थित तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कलक्ट्रेट में एडीएम, एसडीएम और चकबंदी न्यायालयों में सैंकड़ों की संख्या में वादी तारीख देखने आते है। कलक्ट्रेट में मुकदमे की पैरवी करने आए बर्डपुर क्षेत्र के फखरूद्दीन कहते है कि वह 25 वर्ष से यहां भूमि विवाद संबंधी मुकदमे के निस्तारण के लिए हर तारीख पर चक्कर काटते है। जमीन तो अब तक मिली नहीं, लेकिन मुकदमे में हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं। अभी तक सिर्फ तारीख पे तारीख ही मिल रही है। अब तो उम्र ज्यादा होने के कारण आने जाने में समस्या हो रही है, लेकिन मुकदमा हुआ है तो झेलना पडेगा।
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मुकदमों के बोझ से हांफ रही राजस्व अदालतें, 15 हजार से अधिक मुकदमे लंबित
सिद्धार्थनगर। जिले की राजस्व अदालतों में मुकदमों का बोझ बढ़ गया है। वादकारियों को तारीख पर तारीख मिल रही है। तहसीलों का चक्कर लगाकर वादकारी थक चुके हैं। एसडीएम व तहसीलदार तो अधिकतर समय सामान्य शिकायतों को निस्तारित करने में गुजर जाता है, इससे न्यायिक प्रकिया उलझे मुकदमों की सुनवाई के लिए समय कम मिल पाता है। जिला मुख्यालय समेत सभी तहसीलों में 15 हजार से भी ज्यादा मुकदमे लंबित हैं। इसमें भूमि विवाद से संबंधित मामले अधिक है।
जानकारी के अनुसार नौगढ़, बांसी, इटवा, डुमरियागंज और शोहरतगढ़ तहसीलों में राजस्व मुकदमों का बोझ है। राजस्व से जुड़े विवाद इन दिनों बढ़ते जा रहे हैं। राजस्व अदालतों में ज्यादातर मामले में बंटवारे के आते हैं। कई बार वरासत और दाखिल खारिज के मामले में सुलझने में लंबे वक्त लग जाते हैं। इस बीच लोगों को अदालतों का चक्कर लगाना पड़ता है। दरअसल, उप जिलाधिकारियों का अधिकतर वक्त कानून व्यवस्था दुरुस्त करने से लेकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन एवं शिकायती पत्रों के निस्तारण में गुजर जाता है। तहसीलदारों के साथ भी ऐसा ही होता है। ऐसे में कोर्ट के लिए समय कम मिलता है।

राजस्व अदालत लंबित वाद
एडीएम कोर्ट 1500
एसडीएम नौगढ़ कोर्ट 1049
तहसीलदार नौगढ़ कोर्ट 700
एसडीएम इटवा कोर्ट 1200
तहसीलदार इटवा कोर्ट 1100
एसडीएम डुमरियागंज कोर्ट 1150
तहसीलदार डुमरियागंज 850
एसडीएम शोहरतगढ़ 1200
तहसीलदार शोहरतगढ़ 1000
एसडीएम बांसी कोर्ट 1100
तहसीलदार बांसी कोर्ट 900
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पिछले 15 वर्ष से भूमि संबंधित मुकदमा तहसील में चल रहा हैं। जिसमें सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है और हर तारीख पर तहसील का चक्कर काटना पड़ रहा है। पर अभी भी मुकदमे के निस्तारण की उम्मीद नहीं दिख रही है।
-महेंद्र उपाध्याय, तेतरी बुजुर्ग उसका बाजार निवासी


पिछले 35 वर्षों से राजस्व अदालत में मुकदमा की तारीख पर तारीख देख रहे हैं अभी तक निस्तारित नहीं हुआ है, जबकि एक बार पुकार पर चंद मिनट देर से पहुंचने पर मुकदमा खारिज कर दिया, जिसकी कायमी डालने पर फिर मुकदमा शुरू हुआ।
-रंगनाथ पांडेय, महुलानी निवासी

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समय पर सुनवाई न होने से बढ़ रहे मुकदमे
राजस्व अधिकारी जल्दी कोर्ट नहीं करते और जब कोर्ट करते हैं तो पत्रावली में पुकार लगने के बाद पहली बार भी कुछ देर की ही गैर हाजिरी पर न्यायहित में अवसर दिए बगैर तुरंत मुकदमा खारिज कर देते हैं। अधिवक्ताओं की अन्य कोर्टों में व्यस्तता की वजह से सभी कोर्टों में एक साथ पहुंच पाना संभव नहीं होता है जिसका नाजायज फायदा राजस्व अधिकारी उठाते हैं।
-कृपा शंकर त्रिपाठी, एडवोकेट

दो से तीन दशकों से तहसील की अदालतों में मुकदमे लंबित हैं। अदालतों की प्रकृति है कि तय समय में गुण व दोष के आधार पर मुकदमों का निस्तारण कर दिया जाए। गैर विवादित मामलों का निस्तारण समय से कराया जाए। उन्होंने बताया कि समय से तारीख सुनवाई न होने के चलते मुकदमों को संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे मुकदमों का साप्ताहिक तारीख लगाकर सुनवाई होनी चाहिए।
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-अनिल विश्वकर्मा एडवोकेट

राजस्व अदालतों में मुकदमों की सुनवाई कर त्वरित निस्तारण के लिए लगातार निर्देशित किए जा रहे है और मुकदमे भी निस्तारित हो रहे हैं, इनमें तेजी लाने के निर्देश दिए जाएंगे।
-उमाशंकर, एडीएम
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