सिद्धार्थनगर। बेसिक शिक्षा के प्रति अभिभावकों को तरह-तरह की सुविधाएं देने का सिलसिला जारी है। इसके बाद भी जर्जर हो चुके स्कूलों के भवनों की मरम्मत अथवा नए भवन बनवाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो पा रही है। हाल में सर्वे के दौरान जिले में 399 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय के भवन जर्जर स्थिति में हैं। इनमें 54 ऐसे पाए गए, जिनमें अतिरिक्त कक्षा के लिए कक्ष भी नहीं उपलब्ध है। लिहाजा इन स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे ही नहीं, शिक्षकों को भी असुरक्षा का भय बना रहता है।
बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के भवनों का सर्वे कराने के लिए शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने सभी बीएसए को पत्र भेजा।
उन्होंने जर्जर हो चुके विद्यालयों के बच्चों को सुरक्षित करने को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए सख्त हिदायत दी। सर्वे के बाद जिले में 399 विद्यालय मिले, जिनके भवन जर्जर पाए गए। सर्वाधिक संख्या बांसी के 57 व सबसे कम लोटन ब्लॉक में एक स्कूल शामिल है। इसमें 345 जर्जर स्कूलों के पास अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध है। इसके माध्यम से बच्चों को सुरक्षित ढंग से पढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा 54 विद्यालयों में नौनिहाल जिंदगी व मौत के बीच पढ़ाई को मजबूर हैं। यहां एक भी एसीआर यानी अतिरिक्त कक्षा कक्ष भी नहीं है। जिला समन्वयक निर्माण रितेश श्रीवास्तव ने बताया कि जर्जर भवनों की सूचना निदेशालय को दे दी गई है। बजट की उपलब्धता होते ही मरम्मत कार्य शुरू कराए जाएंगे।
शिक्षा निदेशक से मिले निर्देश के बाद सर्वे में चिह्नित अतिरिक्त कक्षा कक्ष वाले विद्यालयों से संबंधित बीईओ को उनसे जुड़े बच्चों को आसपास के सुरक्षित स्थानों पर शैक्षणिक कार्य कराए जाने के लिए सख्त निर्देश दे दिए गए हैं।
-राम सिंह, बीएसए
अतिरिक्त कक्षा कक्ष विहीन स्कूल
ब्लाक संख्या
नौगढ़ 2
शोहरतगढ़ 14
खुनियांव 3
इटवा 4
भनवापुर 5
मिठवल 2
बांसी 14
खेसरहा 5
जोगिया 1
उस्का बाजार 3
लोटन 1