कटरा (श्रावस्ती)। कोरिया से 1200 बौद्ध अनुयायियों का दल मंगलवार को श्रावस्ती पहुंचा। दल ने दो दिनों तक विभिन्न स्थलों का दौरा कर पूजन किया। जेतवन में प्रार्थना के बाद श्रावस्ती के कोरियन मंदिर के प्रमुख भिक्षु दे इन ने कहा कि गौतम बुद्ध के मत में अष्टांगिक मार्ग ही वह मध्यम मार्ग है, जिससे दुख का निदान होता है। मध्यम मार्ग ज्ञान देने वाला है, शांति देने वाला है, निर्वाण देने वाला है और कल्याणकारी है। जो कल्याणकारी है वही श्रेयस्कर है। उन्होंने कहा कि गौतम बुद्ध विश्व कल्याण के लिए मैत्री भावना पर बल देते हैं।
ठीक वैसे ही जैसे महावीर स्वामी ने मित्रता के प्रसार की बात कही थी। गौतम बुद्ध मानते हैं कि मैत्री के मोगरों की महक से ही संसार में सद्भाव का सौरभ फैल सकता है। वे कहते हैं कि बैर से बैर कभी नहीं मिटता। अबैर व मैत्री से ही बैर मिटता है। पूजन के बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।