सीमा क्षेत्र के भचकाही गांव में बनी पानी की टंकी से तीन सात से बाधित है जलापूर्ति
बीएडीपी योजना से करीब आठ वर्ष पूर्व कराया गया था निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी श्रावस्ती। नेपाल सीमा से सटे भचकाही गांव के ग्रामीण विगत तीन वर्ष से नल से जल के लिए तरस रहे हैं। बीएडीपी योजना से स्थापित ओवरहेड टैंक कुछ माह ही जलापूर्ति दे सका था। मोटर जल जाने व पाइप फटने के कारण तीन वर्ष पूर्व बाधित जलापूर्ति को अब तक बहाल नहीं कराया जा सका है। ऐसे में ग्रामीण निजी हैंडपंपों का सहारा लेने को विवश हैं।
सीमावर्ती सिरसिया विकास क्षेत्र के भूगर्भ जल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक है। इसके कारण लोग पेट व त्वचा जनित बीमारियों की चपेट में आ रहे थे। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए आठ वर्ष पूर्व बार्डर एरिया डेवलेपमेंट प्रोग्राम के तहत लाखों रुपये खर्च कर सीमा क्षेत्र के भचकाही गांव में ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया था।
इसमें कार्यदायी संस्था के ठेकेदार की ओर से घटिया दर्जे की पाइपलाइन बिछाई गई थी। इसका स्थानीय ग्रामीणों की ओर से विरोध भी किया गया था। इसके बावजूद ओवरहेड टैंक स्थापित कर कार्यदायी संस्था ने अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति ले ली।
ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद 2020 में इस ओवरहेड टैंक से जलापूर्ति बहाल कराई गई थी। कुछ समय सेवा देने के बाद जहां इसकी पाइप लाइन फटने लगी। वहीं, यहां लगा पानी का मोटर भी कुछ माह बाद ही खराब हो गया। तब से लेकर अब तक ग्रामीणों की ओर से कई बार इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई।
इसके बावजूद न तो खराब पानी का मोटर सही कराया गया। और न ही क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत ही कराई जा रही है। ऐसे में ग्रामीण न चाहते हुए भी निजी हैंडपंपों का आर्सेनिक युक्त पानी पीने को विवश है। वहीं इस बारे में एडीएम अमरेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो जांच कराकर आपूर्ति बहाल कराई जाएगी।